|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व अमरीकी सैनिक के ख़िलाफ़ आरोप लगे
अमरीकी सेना के एक पूर्व इमाम और दो अरबी भाषा के अनुवादकों के ख़िलाफ़ जासूसी के मामले में आरोप लगाए गए हैं. उधर अमरीकी सरकार के एक प्रवक्ता ने ग्वांतानामो बे में कैदियों को रखना सही ठहराया है. इससे पहले कुछ प्रमुख अमरीकियों ने ग्वांतानामों बे में कैदियों को रखने की तीखी आलोचना की थी. इन पूर्व न्यायाधीशों, कूटनीतिज्ञों और सैनिक अधिकारियों ने देश के सर्वोच्च न्यायलय से अनुरोध किया है कि वह कैदियों को वहाँ रखने की क़ानूनी वैधता परखे. ग्वांतानामो बे में लगभग छह सौ लोग दो साल से कैद हैं. 'ये आतंकवादी हैं' अमरीकी सेना के पूर्व इमाम हैं जेम्स यी जो यौसुफ़ यी के नाम से भी जाने जाते हैं और जिन्हें ग्वांतानामों बे में तैनात किया गया था.
यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो हर आरोप के लिए उन्हें दो साल तक की कैद हो सकती है. उधर सर्वोच्च न्यायालय को अनुरोध करने वाले अमरीकियों के गुट ने सोलह कैदियों की अपील का भी समर्थन किया है. अमरीका इन्हें युद्धबंदी नहीं मानता और इन्हें ऐसे दुश्मन बताता है जिन्हें युद्धबंदियों को दिए जाने वाले अधिकार नहीं दिए जा सकते. अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों को कैद करने के विशेष कारण हैं और समय आने पर उनपर क़ानून के तहत मुकद्दमा चलाया जाएगा. अमरीकी सरकार के एक प्रवक्ता स्कॉट मैक्कलीएन ने कहा, "ये लोग आतंकवादी हैं और इनके साथ जिनेवा समझौते के अनुसार व्यवहार किया जा रहा है." |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||