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चीन-जापान संबंध पर नया संकट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन और जापान के बीच जारी मतभेदों के मध्य दो नए घटनाक्रमों के कारण स्थिति और ख़राब होने की आशंका प्रकट की जा रही है. एक तो टोक्यो हाईकोर्ट ने दूसरे विश्वयुद्ध के समय जापान की ओर से जीवाणु युद्ध के बारे में किए जा रहे प्रयोगों के लिए हर्जाना माँगने की चीन के 10 नागरिकों की अर्ज़ी ठुकरा दी है. वहीं दूसरी ओर चीन ने ये माँग की है कि जिन जगहों पर ये परीक्षण किए गए उन्हें संयुक्त राष्ट्र की धरोहर का दर्जा दिया जाए. इस बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने चीन और जापान के नेताओं से अपने मतभेदों को दूर करने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि दोनों देशों को गुरूवार से इंडोनेशिया में शुरू हो रहे एशिया-अफ़्रीका शिखर सम्मेलन मे अपने संबंधों को सामान्य करने का प्रयास करना चाहिए. तनाव जापान और चीन के संबंधों में इस महीने तनाव पैदा हो गया जब जापान में ऐसी पाठ्यपुरस्तकों को स्वीकृति मिली जिनपर युद्ध के समय जापान की कार्रवाई पर पर्दा डालने का आरोप लगाया गया है. इस बारे में चीन में पिछले दिनों कई बड़े विरोध प्रदर्शन हुए जिनके बारे में ये कहा जा रहा है कि चीन की सरकार ने उसे मौन सहमति दी थी. साथ ही चीन में जापान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिए जाने के दावे का भी विरोध किया जा रहा है. नए विवाद जापान की एक अदालत ने चीन के 10 नागरिकों और उनके संबंधियों की जीवाणु युद्ध के लिए मुआवज़ा माँगने की अर्ज़ी ठुकरा दी है. जापान ने ये परीक्षण 1930 और 1940 के दशक में चीन में किए थे. साथ ही इन लोगों ने 1937-38 के नानजिंग नरसंहार के लिए भी मुआवज़ा माँगा था जिसे ठुकरा दिया गया. चीन के सरकारी मीडिया ने देश के हिलोंगजियांग प्रातं में यूनिट 731 को संयुक्त राष्ट्र धरोहर बनाए जाने की माँग की है. चीन का कहना है कि वहाँ द्वितीय विश्वयुद्ध के समय 3,000 लोग मारे गए थे आस-पास के लगभग दो लाख लोगों की जान भी शायद परीक्षणों के कारण ही गई. |
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