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जापान-चीन समुद्री विवाद और बढ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जापान सरकार ने चीन के साथ विवाद वाले समुद्री क्षेत्र ईस्ट चाइना सी में तेल और गैस के शोधन के लिए अधिकार देने की दिशा में कुछ क़दम उठाए हैं. चीन ने इस मामले में चेतावनी दी है कि जापान इस दिशा में आगे नहीं बढ़े. चीन पहले से ही इस क्षेत्र में तेल और गैस का शोधन करने की संभावनाएँ तलाश रहा है जिस पर जापान ने आपत्ति कर रखी है. बीबीसी की एशिया मामलों की जानकार जिल मिकगिवरिंग का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव में यह ताज़ा अध्याय है. इस्ट चाइना सी के बारे में अनुमान है कि इसमें तेल और गैस का काफ़ी बड़ा भंडार है और लगभग एक दशक से ये भंडार जापान और चीन के बीच तनाव का कारण रहा है. जब मामला ज़्यादा गर्म होता है, भावनाओं में ज़्यादा उबाल आता है तो दोनों ओर राष्ट्रवाद भी जागृत हो जाता है. कई बार इस समुद्र में स्थित चट्टानी टापुओं पर झंडे भी लगाए गए हैं जिससे तनाव और बढ़ा है. लेकिन इसके पीछे ठोस आर्थिक कारण हैं. दोनों देश समुद्रतल पर अधिकार चाहते हैं जिससे तेल और गैस पर अधिकार हो सके. जब पिछले साल जापान ने इस क्षेत्र में भूगर्भीय सर्वेक्षण करवाया तो उसे चीन की फटकार सुननी पड़ी. जापान को आशंका है कि चीन ने जो उस इलाके में प्राकृतिक गैस प्लांट लगाया है उसके ज़रिए वो उन इलाकों से भी गैस निकाल सकेगा जो जापान की सीमा में हैं. सहमति नहीं दरअसल दोनों देश किसी समुद्री सीमा पर सहमति नहीं बना पाए हैं और जब दोनों ही देश दुनिया के सबसे ज़्यादा उर्जा खपत वाले देश हों तो प्राकृतिक संसाधनों के लिए इस तरह की होड़ स्वाभाविक है.
जापान ने कहा है कि उसने जो क़दम उठाया है वो हाल में चीन में हुए विरोध प्रदर्शनों के कारण नहीं हैं लेकिन ये तय है कि इस क़दम से दोनों देशों के बीच चल रहे तनाव में कोई कमी नहीं आएगी. हाल ही में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने भारत में एक बयान दिया था कि जापान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट का ख़याल भी छोड़ दे, जब तक कि वो इतिहास का सामना नहीं करता. जापान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हात्सुहिसा ताकासिमा ने इस बयान पर प्रतिक्रया कुछ इन शब्दों में दी, "जापान ने अपने इतिहास का पूरी तरह से सामना किया है. युद्ध के दौरान हमने जो भी किया उसके लिए हमने माफ़ी मांगी है." "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का हमारा इतिहास देखिए, पिछले साठ सालों में हम लोग एक शांतिप्रिय लोकतंत्र की तरह रहे हैं, हमने किसी देश पर हमला नहीं किया है और हम लगातार ग़रीब देशों की मदद करते रहे हैं." वैसे ये भी माना जा रहा है कि तेल और गैस की खोज में बढ़ाए गए क़दम से जापान ने अगले रविवार को दोनों देशों के बीच होने वाली विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए अपनी स्थिति और मज़बूत कर ली है. |
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