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चीन का माफ़ी माँगने से इनकार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन के विदेशमंत्री ली ज़ाओज़िंग ने जापान से कहा है कि उनके यहाँ हो रहे जापान विरोधी प्रदर्शनों पर उसके माफ़ी माँगने का कोई कारण ही नहीं बनता. उन्होंने ये बयान ऐसे समय दिया है जब जापान के विदेशमंत्री नोबुताका माचिमुरा चीन का दौरा कर रहे हैं. चीन में पिछले कई हफ़्तों से जापान विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. जापानी विदेश मंत्री बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री ली ज़ाओज़िंग से मिलनेवाले हैं. इस बीच चीन में रविवार को भी कई जगहों पर जापान विरोधी प्रदर्शन हुए हैं. रविवार को चीन के पूर्वोत्तर हिस्से में स्थित शेन्यांग शहर में बड़ा प्रदर्शन हुआ. जापान ने शनिवार को इन प्रदर्शनों पर आपत्ति प्रकट करते हुए इनको नियंत्रित नहीं कर पाने के लिए चीन सरकार की आलोचना की थी. जापानी विदेश मंत्री ने कहा है कि वह चीन से इस दिशा में और प्रभावी क़दम उठाने का अनुरोध करेंगे. साथ ही उन्होंने कहा है कि चीन में प्रदर्शनों के कारण जापानी इमारतों और व्यवसायों को हुए नुक़सान का हर्जाना देने की भी माँग की जाएगी. विवाद चीन में ये प्रदर्शन जापान में स्कूल की नई पाठ्यपुस्तकों के विरोध में हो रहे हैं जिनमें कहा जा रहा है कि युद्ध के समय जापान के अत्याचारों को कम आँका गया है. विरोधी इस बात से नाराज़ हैं कि एक किताब में चीन के नानजिंग शहर में 1937 में जापानी सैनिकों के हाथों 2,50,000 नागरिकों की हत्या को एक 'घटना' बताया गया है जबकि अन्य जगहों पर इसे 'नरसंहार' कहा जाता है. वे ये भी कह रहे हैं जापानी सैनिकों के व्यापक पैमाने पर एशियाई महिलाओं को यौन ग़ुलाम बनाए जाने की भी लीपापोती की गई है. उधर जापान कह रहा है कि पुस्तकों को छापने की ज़िम्मेदारी निजी कंपनियों की थी ना कि सरकार की और ये स्कूलों की ज़िम्मेदारी है कि वे कौन-सी पुस्तकें पाठ्यक्रम में रखना चाहते हैं. साथ ही प्रदर्शकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के जापान के दावे से भी नाराज़ हैं. |
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