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'धनी देशों ने ग़रीब बच्चों की उपेक्षा की' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शिक्षा के लिए अभियान चलानेवाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कई धनी देशों पर दुनिया के ग़रीब बच्चों की उपेक्षा का आरोप लगाया है. ग्लोबल कैम्पेन एडुकेशन नामक संस्था की इस रिपोर्ट में धनी देशों पर ये आरोप लगाया कि उन्होंने दुनिया के सबसे ग़रीब बच्चों की शिक्षा के लिए किए गए वादों को पूरा नहीं किया. ये रिपोर्ट वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की एक मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान जारी की गई. इस बैठक में पूरी दुनिया में प्राथमिक शिक्षा के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा हो रही है. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने सन् 2015 तक सभी बच्चों के लिए प्राथमिक शिक्षा हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया था. ये लक्ष्य पाँच वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र के एक शिखर सम्मेलन में तय किया गया था. ग्लोबल कैंपेन फ़ॉर एडुकेशन की रिपोर्ट का कहना है कि अभी भी 10 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं. संस्था ने अपनी रिपोर्ट में 22 देशों को विभिन्न ग्रेड दिए हैं. नॉर्वे और नीदरलैंड को ए ग्रेड मिला है मगर अमरीका और ऑस्ट्रिया को एफ़ ग्रेड मिला. ये ग्रेड इन देशों की कुल विकास में दिए गए योगदान और केवल शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान के आधार पर दिए गए हैं. संस्था ने ये भी कहा है कि इस वर्ष लड़कियों को शिक्षा हासिल करने के लिए बराबरी का अधिकार दिए जाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो सकता है. |
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