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सोमवार, 04 अप्रैल, 2005 को 04:15 GMT तक के समाचार
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नए पोप के चयन पर अटकलें
पोप जॉन पॉल द्वितीय
वह चार शताब्दियों में पहले ग़ैर-इतालवी पोप थे
पोप जॉन पॉल द्वितीय के निधन पर शोक अवधि की समाप्ति के साथ ही उनके उत्तराधिकारी के चयन का काम शुरू हो जाएगा जिसके लिए दुनिया के कार्डिनल विचार विमर्श शुरू कर देंगे.

क़यास लगाए जा रहे हैं कि नए पोप शायद फिर से ग़ैर इतालवी ही हों, लातिनी अमरीका या अफ़्रीका से भी हो सकते हैं लेकिन यूरोप के भी कई प्रबल दावेदार हैं.

बीबीसी संवाददाता फ़ियोना वर्ज का कहना है कि विकासशील देशों में कैथोलिक ईसाइयों की संख्या जिस तरह से बढ़ी है उससे ये संभव है कि नए पोप वहाँ से ही हों.

दुनिया के आधे से ज़्यादा कैथोलिक इसाई उत्तर और दक्षिण अमरीकी महाद्वीपों में रहते हैं और ब्राज़ील ऐसा देश है जहाँ सबसे अधिक कैथोलिक इसाई रहते हैं. लातिनी अमरीका के कार्डिनलों का अब बड़ा शक्तिशाली गुट है.

लेकिन रोम के अमरीकी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रोफ़ेसर जेम्स वुल्स्टन का मानना है कि नए पोप को कई मापदंडो पर खरा उतरना होगा और संभवत: नए पोप इटली से ही हो सकते हैं.

वुल्स्टन कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि अगले पोप उदारवादियों की ओर हाथ बढ़ाएँगे लेकिन ऐसा नहीं लगता कि वे उदारवादियों को कोई शक्ति प्रदान करेंगे. नए पोप ऐसे व्यक्ति होंगे जो न तो रूढ़िवादी माने जाते हों और न ही उदारवादी और वे ज़्यादा युवा भी नहीं होंगे कि उनका कार्यकाल 26 साल तक चलता रहे."

वुल्स्टन मानते हैं कि फ़िलहाल लोगों का ये कहना है कि नए पोप के विकासशील देशों से होने की जगह इतालवी होने की ज़्यादा संभावना है.

उधर दक्षिण अफ़्रीका के आर्कबिशप डेसमंड टुटू ने नसलवाद के ख़िलाफ़ अभियान से जुड़ने के लिए पोप जॉन पॉल की सराहना की है. उन्होंने आहवान किया कि 1500 साल में पहली बार अफ़्रीका से नए पोप का चयन होना चाहिए.

"हमें उम्मीद है कि जब कार्डिनल मिलते हैं तो वे शायद पहले ग़ैर-इतालवी पोप के बाद पहली बार किसी अफ़्रीकी को पोप चुनेंगे."

दूसरी ओर भारत के झारखंड राज्य में राँची से कार्डिनल टेलिस्फ़ोनी टोप्पो भी नए पोप की चयन प्रक्रिया में भाग लेने वैटिकन जा रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि नए पोप का चयन ईश्वर पर निर्भर होगा.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि नए पोप जो कोई भी हों, उनके लिए पोप जॉन पॉल जैसा बनना कठिन काम होगा लेकिन यह स्पष्ट है कि पोप जॉन पॉल की तरह उन्हें भाषाओं का ज्ञान होगा और समाचार माध्यमों से तालमेल रखने में भी वे सक्षम होंगे.

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