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लेबनान के प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लेबनान के सीरिया समर्थक माने जाने वाले प्रधानमंत्री उमर करामी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. करामी के ख़िलाफ़ संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर विचार हो रहा था और उसी दौरान टेलीविज़न पर उन्होंने अपने इस्तीफ़े की घोषणा कर दी. इस ख़बर से उन प्रदर्शनकारियों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई जो प्रधानमंत्री करामी की सरकार के ख़िलाफ़ राजधानी बेरूत में संसद के पास धरना दिए हुए थे. अमरीका ने कहा कि उमर करामी का इस्तीफ़ा लेबनान के लोगों के लिए एक मौक़ा बनकर आया है कि वे एक ऐसी सरकार चुनें जो वास्तविक रूप में देश की विभिन्नता का प्रतिनिधित्व करे. व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता स्कॉट मैक्केलन ने कहा है कि नई सरकार की ज़िम्मेदारी लेबनान में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना होगी. सीरिया की आरंभिक प्रतिक्रिया में कहा गया है कि यह लेबनान का अंदरूनी मामला है. जबकि सीरिया की राजधानी दमिश्क में एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सीरिया सरकार की चिंता बढ़ रही है क्योंकि लेबनान की स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर होती जा रही है.
संवाददाता का कहना है कि लेबनान में जो नई सरकार बनेगी वह सीरिया से अपने सेनाएँ हटाने के लिए भी कह सकती है. उधर प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दलों ने कहा कि करामी की सरकार का पतन सिर्फ़ एक क़दम है और उनके प्रदर्शन जारी रहेंगे. उनकी माँग है कि लेबनान से सीरिया सीरियाई सैनिक और ख़ुफ़िया सेवा के अधिकारी वापस हों. पिछले क़रीब तीस साल से सीरियाई सैनिक लेबनान में मौजूद हैं. करामी ने कहा कि सरकार को उन लोगों के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए जो देश का हित चाहते हैं. क़रीब एक पखवाड़े पहले लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री रफ़ीक़ हरीरी की एक बम विस्फोट में मौत के बाद से वहाँ राजनीतिक संकट बना हुआ है. लेबनान के विपक्षी दलों ने हरीरी की मौत में सीरिया का हाथ होने का आरोप लगाया था जबकि सीरिया ने इस विस्फोट में किसी भी तरह का हाथ होने से इनकार किया था. |
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