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रूस ईरान को परमाणु ईंधन देगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रूस और ईरान ने परमाणु ईंधन की आपूर्ति के एक ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस समझौते के तहत रूस दक्षिणी हिस्से में स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र को ईंधन की आपूर्ति कर सकेगा लेकिन ईरान इस्तेमाल किए हुए ईंधन की छड़ें रूस को वापस भेजेगा. अमरीका, रूस और अन्य देशों की यही चिंता है कि ईरान इस्तेमाल किए हुए परमाणु ईंधन को परमाणु हथियार बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है. अमरीका ने रूस पर भी दवाब डाला था कि वह ईरान से परमाणु क्षेत्र में सहयोग नहीं करे लेकिन रूस ने उन दबावों को नज़रअंदाज़ करते हुए ईरान के साथ यह समझौता किया है. तेहरान में बीबीसी संवाददाता फ्रांसिस हैरिसन का कहना है कि इन्हीं चिंताओं को दूर करने के लिए समझौते में यह व्यवस्था की गई है कि ईरान इस्तेमाल किए गए ईंधन के अवशेषों को रूस को वापस करेगा. समझौते में ईंधन की आपूर्ति के लिए कार्यक्रम निर्धारित किया गया है लेकिन फिलहाल तारीख़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. ईरान के परमाणु ऊर्जा विभाग के मुखिया ग़ुलामरेज़ा आग़ाज़ादेह और रूस के परमाणु ऊर्जा प्रमुख अलेक्ज़ांद्र रूमयंतसेफ़ के बीच यह समझौता हुआ है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि यह समझौता काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान का बुशेहर परमाणु संयंत्र ऐसी पहली परमाणु ऊर्जा परियोजना होगी जो नियमित रूप से काम कर सकेगी. अमरीका सहित कुछ देशों के विरोध के मद्देनज़र ईरान के लिए बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ़ ऊर्जा उद्देश्यों के लिए है. लेकिन ईरान के लगातार ऐसा कहने के बावजूद कुछ राजनयिकों का कहना है कि जाँच में पता चलता है कि ईरान के पास पिछले क़रीब दो दशक से परमाणु हथियारों की तकनीक की जानकारी है और यह तकनीक उसने पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक डॉक्टर अब्दुल क़दीर ख़ान से ली थी. |
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