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मतदान का आँखों देखा हाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मैं बसरा के पास अल ज़ुबैर में हूँ जो दक्षिणी इराक़ का दूसरा सबसे बड़ा शहर माना जाता है. मैंने अल ज़ुबैर को इसलिए चुना क्योंकि यहाँ शिया बहुसंख्यक तो हैं लेकिन लगभग पैंतीस प्रतिशत सुन्नी आबादी भी है, इराक़ के बाक़ी शिया बहुल शहरों में इतनी सुन्नी आबादी नहीं है. आशंका जताई जा रही थी कि यहाँ चुनाव के दौरान बहुत अधिक हिंसा हो सकती है. यहाँ मतदान करने वालों की लंबी क़तारें दिखाई दीं, मैं सुबह के सात बजे से मतदान केंद्रों को देख रही हूँ, सुबह में दस-पंद्रह की तादाद में लोग आ रहे थे लेकिन दस बजते-बजते लंबी लाइनें लग गईं. अल ज़ुबैर में मतदान केंद्र देखने लायक़ हैं, ऐसा लगता है कि बर्थडे की पार्टी हो रही है, मतदान केंद्रों पर झालरें और ग़ुब्बारे लटके हैं, मतदान अधिकारियों का कहना है कि वे दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वे चुनाव को एक ख़ुशी का अवसर मानकर उसका उत्सव मना रहे हैं.
दोपहर तक भीड़ और बढ़ गई थी लोग अपने पूरे परिवार के साथ घरों से निकल आए थे और वोट डालने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे. चुनाव अधिकारियों ने मुझे बताया कि हर मतदान केंद्र पर लगभग तीन हज़ार वोटर रजिस्टर्ड हैं, उन्होंने यह भी बताया कि बाक़ी मतदान केंद्रों पर भी इसी तरह की भीड़ है. मतदान केंद्र पर तैनात अधिकारियों ने मुझे अचंभे में डालने वाली बात बताई, उनका कहना था कि उन्हें आशा है कि दक्षिणी इराक़ में सौ प्रतिशत मतदान होगा क्योंकि लोगों में दशकों बाद मिले इस अवसर को लेकर बहुत उत्साह है.
जब मैंने उनसे कहा कि किसी भी लोकतंत्र में कभी सौ प्रतिशत मतदान नहीं होता तो उन्होंने कहा कि भारत की बात अलग है लेकिन इराक़ में सौ प्रतिशत मतदान हो सकता है. लेकिन जिस शहर में पैंतीस प्रतिशत सुन्नी हों वहाँ सौ प्रतिशत मतदान होने की बात हजम नहीं होती, मैंने पंद्रह मतदान केंद्रों का दौरा किया है मुझे सिर्फ़ एक सुन्नी वोटर मिला जिनसे मैंने बात की. सिर्फ़ देखकर शिया सुन्नी में अंतर बताना मुश्किल है, लोग कह रहे हैं कि सुन्नी भी वोट डाल रहे हैं लेकिन उतनी तादाद में नहीं जितना कि शिया. कुछ भी हो, लेकिन सौ प्रतिशत मतदान वाली बात तो असंभव लगती है. जिस सुन्नी वोटर से मेरी बात हुई वे दस किलोमीटर दूर से वोट डालने आए थे और उनका कहना था कि वे बहुत ख़ुश हैं कि ज़िंदगी में पहली बार उन्हें अपनी मर्ज़ी से वोट डालने का मौक़ा मिला है. इस इलाक़े में मस्जिदों में लोगों से अपील की गई है कि वे घरों से निकलकर वोट डालें, कई लोगों ने मुझे बताया मस्जिद के फ़रमान के कारण वे वोट डालने निकले हैं, ऐसे में शिया धार्मिक नेता आयतुल्लाह सिस्तानी के समर्थन वाले गठबंधन को अधिक हिमायत मिलती दिख रही है. |
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