|
चुनाव में पूरी तरह सुरक्षा असंभव: अलावी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने स्वीकार किया है कि इस माह के अंत में होने वाले संसदीय चुनावों में पूरी तरह सुरक्षा प्रदान करना असंभव है. उनका कहना था कि जो क़दम उठाए जा रहे हैं वे विद्रोहियों के हमलों को पूरी तरह नाकाम करने के लिए पर्याप्त नहीं है. इराक़ में चुनावों से पहले हिंसक घटनाओं में लगातार तेज़ी आई है है और शुक्रवार को दो आत्मघाती हमलों में 18 लोग मारे गए. हिंसक घटनाएँ होने के डर से हस्पतालों को अतिरिक्त कर्मचारी बुलाने और दवा आदि सामग्री जुटाने के आदेश दिए गए हैं. इस हिंसा के बारे में एक टेलीविज़न पर बयान देते हुए अलावी ने कहा, "मौजूदा क़दम चमरंथियों के हमले रोकने के लिए काफ़ी नहीं हैं." चुनाव के मौक़े पर तीन दिन के लिए सभी सीमाएँ सील कर दी जाएंगी और मतदान केंद्रों के आसपास कोई वाहन भी ले जाने की इजाज़त नहीं होगी. इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के मुख्य चुनाव अधिकारी भी अलावी के इस बयान से सहमत नज़र आते हैं. उन्होंने इराक़ में चुनाव के लिए प्रबंध करना एक बहुत ही ख़तरनाक और डराने वाला काम है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इतना ख़तरा महसूस किया जा रहा है कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय संगठन अपने चुनाव पर्यवेक्षक नहीं भेजना चाहता है और पत्रकारों के लिए भी मतदान की ख़बरें देना काफ़ी मुश्किल होगा. इराक़ सरकार ने तमाम पत्रकारों को कह दिया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए ख़ुद ज़िम्मेदार होंगे. बग़दाद में बीबीसी संवाददाता कैरोलीन हावली का कहना है कि इस महत्वपूर्ण चुनाव का हर पहलू हिंसा से अछूता नहीं रहा है. हावली का कहना है कि इस चुनाव में घर-घर जाकर प्रचार देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि कई उम्मीदवारों की हत्या हो चुकी है और कई को धमकियाँ भी मिली हैं. इराक़ के सम्मानित शिया नेता आयतुल्ला अली सिस्तानी ने अपने समर्थकों से अनुरोध किया है कि वे चुनाव में भाग लें लेकिन कुछ सुन्नी संगठनों ने चुनाव के बहिष्कार की माँग की है. इराक़ के न्याय मंत्री मालेक दोहान अल-हसन का कहना है कि सुन्नी और शिया समुदायों के बीच सर्वसम्मति के बिना इराक़ में प्रशासन चलाना मुश्किल होगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||