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दुर्व्यवहार के आरोपों की जाँच होगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सैन्य कर्मचारियों के हाथों इराक़ी क़ैदियों के साथ बदसलूकी किए जाने के नए आरोप सामने आए हैं जिन पर व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस मामले की जाँच कराई जाएगी. व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता स्कॉट मैक्कलेलन ने कहा कि इन मामलो में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी और ऐसा फिर से नहीं हो, इसके लिए क़दम उठाए जाएंगे. अमरीकी सरकार के ख़िलाफ़ एक मुक़दमे में संघीय जाँच एजेंसी एफ़बीआई के अधिकारियों के बीच हुए ई-मेल आदान-प्रदान के पत्र जारी किए गए हैं जिनसे पता चलता है कि इराक़ी क़ैदियों और ग्वांतनामो बे शिविर में रखे गए बंदियों के साथ गंभीर दुर्व्यवहार किया गया. इनमें से कुछ पत्र अबू ग़रेब जेल काँड से बाद के हैं. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के आधिकारिक प्रवक्ता मैक्कलेलन ने कहा, "राष्ट्रपति की अपेक्षा है कि अगर दुर्व्यवहार के आरोप हैं तो उन आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए." "उनकी पूरी तरह से जाँच हो, दोषियों की पहचान की जाए और अगर कोई इस तरह के ग़लत काम में शामिल रहा है तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो. ऐसा फिर नहीं हो, इसके लिए ठोस क़दम भी उठाए जाएँ." अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन ने यह साफ़ करने के लिए मुक़दमा दायर किया है कि अमरीका के हाथों क़ैदियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ या नहीं. यूनियन के कार्यकारी निदेशक एंथनी रोमेरो ने कहा कि पत्रों से गंभीर सवाल उठते हैं कि बंदियों के साथ बड़े पैमाने पर हुए दुर्व्यवहार के लिए किसे दोषी ठहराया जाए. उन्होंने कहा, "उच्च सरकारी अधिकारी सिर्फ़ कुछ निचले स्तर के सैनिकों पर उँगली उठाकर जनता की नज़र से छिप नहीं छपते." इस मुक़दमे के लिए पिछले सप्ताह जारी किए गए कुछ पत्रों से कुछ ताज़ा जानकारियाँ सामने आईं कि अमरीकी मरीन सैनिकों ने बंदियों के साथ दुर्व्यवहार किया था. 13 सैनिकों को दोषी ठहराया गया है और कुछ को जेल हुई है. 'आदेश' इन पत्रों को सूचना प्राप्ति के अधिकार अधिनियम के तहत हासिल किया गया है. इन पत्रों में एफ़बीआई एजेंटों ने चिंता ज़ाहिर की है कि बंदियों से पूछताछ के लिए ऐसे तरीक़े इस्तेमाल किए गए जो एजेंट ख़ुद भी इस्तेमाल नहीं करते हैं.
कुछ पत्र पिछले सोमवार को जारी किए गए जिनमें से एक में ऐसे एजेंट का बयान दर्ज है जिसमें उसने "गंभीर शारीरिक दुर्व्यवहार" की बात कही है. यह पत्र 24 जून का है, यानी बग़दाद की अबू ग़रेब जेल में दुर्व्यवहार के मामले सामने आने के दो महीने बाद का. इसे अर्जेंट यानी अति महत्वपूर्ण बताया गया था और एफ़बीआई के निदेशक रॉबर्ट म्यूलर को भेजा गया था. इस संदेश में कहा गया था कि बंदियों को मारा पीटा गया, दम घोंटा गया और कानों में जलती हुई सिगरेट भी रखी गईं. एक अन्य पत्र में कहा गया है कि राष्ट्रपति बुश ने एक ऐसे आदेश पर दस्तख़त किए जिसमें नींद तकनीक, तनाव और दबाव का तरीक़ा और सैन्य कुत्तों के इस्तेमाल जैसे तरीक़ों की इजाज़त दी गई. व्हाइट हाउस ने इन आरोपों पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "एफ़बीआई एजेंटों ने ई-मेल के ज़रिए जो कुछ लिखा वह ग़लत है. पूछताछ की तकनीकों के बारे में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया." ग्वांतनामो ग्वांतनामो बे शिविर के बारे में हासिल हुए एक पत्र में कहा गया है कि वहाँ बंदियों को 24-24 घंटे तक लगातार उकड़ू अवस्था में बिठाया गया, खाना-पानी नहीं दिया गया और यहाँ तक कि उन्हें शौच और पेशाब करने की भी इजाज़त नहीं दी गई. पत्र में कहा गया है कि एक बंदी के बिल्कुल बंद कमरे में एयरकंडीशनिंग बंद कर दी गई जिससे कमरे में असहनीय गर्मी हो गई. उस कमरे में हवा आने का कोई रास्ता नहीं था. "बंदी लगभग बेहोश हो चुका था और उसके पास ही बहुत से बाल पड़े थे. ऐसा लगता है कि बंदी रातभर अपने बाल नोचता रहा होगा." ई-मेल के ज़रिए हुए पत्र आदान-प्रदान में कुछ और जानकारियाँ भी दी गई हैं, जैसेकि -
अमरीकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इन ताज़ा आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है. अलबत्ता प्रवक्ता ब्रयान व्हिटमैन ने इन आरोपों का खंडन किया है कि वोल्फ़ोविट्ज़ ने एफ़बीआई के एजेंटों का रूप धारण करने की तकनीक को मंज़ूरी दी थी. पेंटागन ने कहा है कि इस तरह के कुछ आरोपों की जाँच की जा रही है. |
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