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रविवार, 19 दिसंबर, 2004 को 02:15 GMT तक के समाचार
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नाटक से नाराज़ सिखों ने हमला किया
बर्मिंघम मे थिएटर
बर्मिंघम मे थिएटर के बाहर पुलिस
ब्रिटेन के बर्मिंघम शहर में शनिवार रात सैकड़ों सिखों ने एक थियेटर पर धावा बोला जिसमें पाँच पुलिस कर्मी घायल हो गए.

इन लोगों को उस थियेटर में खेले जा रहे नाटक पर आपत्ति थी.

बर्मिंघम रेपर्टरी थिएटर के इस नाटक का नाम है बेइज़्ज़ती और इसे लिखा है एक सिख लेखिका गुरप्रीत भट्टी ने.

नाटक का कथानक एक गुरुद्वारे में यौन शोषण और हत्या पर आधारित है.

फ़िलहाल विरोध प्रदर्शन करने वालों और थिएटर के प्रबंधन के बीच अब नाटक के भविष्य में मंचन को लेकर बातचीत चल रही है.

आपत्ति

 मुझे ये नाटक देखने के बाद बहुत ग़ुस्सा आया. कितने गोरे भी ये नाटक देखने जाते हैं. ऐसा नाटक देखने के बाद उनके मन में क्या आएगा?
परमिंदर कौर

इस नाटक के ख़िलाफ़ कुछ समय से प्रदर्शन हो रहे थे लेकिन शनिवार शाम लगभग 400 सिख प्रदर्शन करते हुए हिंसा पर उतर आए जिसमें पाँच पुलिस वाले घायल हो गए.

दो लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है.

सिखों का कहना है कि ये नाटक उनके धर्म का मखौल उड़ाता है.

नाटक देखकर आईं परमिंदर कौर ने कहा,"आप गुरुद्वारे जाएँ और फिर पुलिस के पास जाकर ये पूछें कि क्या गुरुद्वारे जाने से बलात्कार हो सकता है – तो ये तो सीधे सीधे सिखों की बदनामी नहीं तो क्या है. ये तो सीधे-सीधे धर्म के ऊपर आक्षेप है जो ठीक नहीं है."

स्थानीय गुरुद्वारे से जुड़ीं परमिंदर कौर का कहना है कि उनका व्यक्तिगत विचार ये है कि नाटक का विरोध सही है.

उन्होंने कहा,"मुझे ये नाटक देखने के बाद बहुत ग़ुस्सा आया. कितने गोरे भी ये नाटक देखने जाते हैं. ऐसा नाटक देखने के बाद उनके मन में क्या आएगा? यही कि गुरुद्वारे जाकर किसी की बेइज़्ज़ती हो सकती है."

खंडन

 ये एक काल्पनिक कृति है जिसमें मानवीय प्रवृत्ति की खामियों और वास्तविक दुनिया में अन्याय और दोहरेपन को दिखाया गया है
बर्मिंघम रेपर्टरी

इस नाटक की लेखिका गुरप्रीत भट्टी ने इन आरोपों का खंडन किया है कि नाटक सिख धर्म का मखौल उड़ाता है.

बर्मिंघम रिपर्टरी ने विरोध के बाद एक बयान जारी कर कहा है कि नाटक का उद्देश्य केवल सच्चाई को सामने रखना था और नाटक के पात्र ऐसे नहीं रखे गए हैं कि वे सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हों.

बयान में कहा गया है,"ये एक काल्पनिक कृति है जिसमें मानवीय प्रवृत्ति की खामियों और वास्तविक दुनिया में अन्याय और दोहरेपन को दिखाया गया है".

रिपर्टरी ने कहा है कि वह नाटक देखने आए दर्शकों को सिख समुदाय के उन प्रतिनिधियों की ओर से जारी एक बयान भी पढ़वाकर सुनाएगी जो नाटक से सहमत नहीं हैं.

साथ ही उन्होंने कहा है कि अपने कार्यक्रम के नोटों में भी इस बात का ख़याल रख रहे हैं कि सिख मत की सकारात्मक तस्वीर पेश की जाए.

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