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न्यूयॉर्क पुलिस में सिख कर सकेंगे नौकरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
न्यूयॉर्क में पहली बार पगड़ी और दाढ़ी वाले सिख पुलिस की वर्दी में दिखाई देंगे. न्यूयॉर्क में सिख बड़ी संख्या में रहते हैं और महानगर प्रशासन के इस फ़ैसले से पुलिस ही नहीं, कई अन्य विभागों में सिख अपनी पहचान क़ायम रखते हुए काम कर सकेंगे. यह सारा मामला दो सिख पुलिस अफ़सरों की पगड़ी और दाढ़ी पर प्रतिबंध लगने से शुरू हुआ. दो वर्ष पहले न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने जसजीत सिंह और अमरीक सिंह को नौकरी के लिए चुना था लेकिन ट्रेनिंग के बाद जसजीत सिंह को नौकरी से इस्तीफ़ा देने पर विवश कर दिया गया जब उन्होंने अपनी पगड़ी उतारने और दाढ़ी कटाने से इनकार कर दिया. पुलिस विभाग का कहना था कि सारे अधिकारियों को एक जैसा दिखना चाहिए और उन्होंने आशंका व्यक्त की कि पगड़ी से कामकाज में भी बाधा आ सकती है. इसी तरह का मामला अमरीक सिंह का भी था, उन्हें भी पगड़ी और दाढ़ी के कारण नौकरी से हाथ धोना पड़ा. अमरीक और जसजीत सिंह ने धर्म का पालन करने से रोकने और भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए पुलिस विभाग को क़ानूनी चुनौती दी. न्यूयॉर्क के मानवाधिकार आयोग ने पुलिस विभाग को निर्देश दिया कि जसजीत सिंह को नौकरी पर बहाल किया जाए और उन्हें पगड़ी-दाढ़ी के साथ काम करने दिया जाए. पुलिस विभाग ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील नहीं की जिससे दोनों सिख कर्मचारियों ने राहत की साँस ली है और ख़ुद को विजयी महसूस कर रहे हैं. ख़ुशी को क़ाबू में करते हुए अमरीक सिंह ने कहा, "मैं बहुत खुश हूँ, यह बहुत बड़ा दिन है, सिख क़ौम के लिए भी. अब सिख लड़के आसानी से सेना में भर्ती हो सकेंगे." जिस दिन नौकरी से निकाला गया था, उस दिन को याद करके अमरीक सिंह ग़मगीन हो जाते हैं, "मुझे बहुत ग़ुस्सा आया था, मुझे लगा कि जिसे मैं अपना मुल्क समझता था उसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया." अब शिकायत दूर हो जाने पर 'अपने देश' के प्रति प्यार दिखाते हुए अमरीक सिंह ने कहा, "गॉड ब्लेस अमरीका." दूसरी नौकरियाँ पुलिस विभाग ही नहीं, दूसरे विभागों में भी सिख अपनी पगड़ी-दाढ़ी को लेकर भेदभाव का निशाना बने हैं, न्यूयॉर्क की एक रेल कंपनी एमटीए ने भी केविन हैरिंग्टन नाम के एक सिख को 20 वर्ष की नौकरी के बाद पद से हटा दिया था. उन्हें यह कहते हुए पद से हटाया गया था कि उनकी पगड़ी के कारण काम में रुकावट आती है, मानवाधिकार आयोग के इस फ़ैसले के बाद हैरिंग्टन के लिए भी उम्मीद जगी है. सिख समुदाय इस फ़ैसले से काफ़ी खुश है, सिख कोलिशन नाम के संगठन के क़ानूनी मामलों के निदेशक अमरदीप सिंह कहते हैं, "यह पहली बार है कि हम बिना किसी रोकटोक या भेदभाव के पुलिस विभाग में काम कर सकेंगे." न्यूयॉर्क के एक और निवासी तेजवीर सिंह कहते हैं, "अब हमें आज़ादी होगी कि जहाँ चाहें काम करे, अब अमरीकियों को भी मालूम पड़ गया कि हम अलग कौम हैं, देशभक्त कौम हैं." अमरीका में सिख समुदाय के बारे में आम लोगों के बीच जानकारी की काफ़ी कमी है, कई बार उन्हें दाढ़ी और पगड़ी के कारण तालेबान या अल क़ायदा का समर्थक समझ लिया जाता है, इस भ्रम के कारण अनेक सिख अमरीका में हिंसा के शिकार हुए हैं. न्यूयॉर्क के सिखों से बात करने पर यही लगता है कि वे इस समस्या से घबराए बिना उसका मुक़ाबला करने का इरादा रखते हैं और आने वाले दिनों में विदेश में रहने वाले सिखों का जीवन आसान बनाने में लगे हैं. वे यह भी मानते हैं कि भारत में एक सिख व्यक्ति के प्रधानमंत्री बनने से दुनिया को उनके समुदाय के बारे में बेहतर तरीक़े से पता चल सकेगा. |
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