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सिख और एशियाई मुसलमान चिंतित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ्रांस में सरकारी स्कूलों में धार्मिक चिन्हों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने वाला विधेयक संसद के निचले सदन ने तो भारी बहुमत पारित कर दिया है. उच्च सदन से भी पारित होने के बाद यह विधेयक क़ानून बन जाएगा. लेकिन फ़्रांस में बसे हुए एशियाई मूल के लोगों, ख़ासतौर पर सिखों और मुसलमानों में इस क़ानून को लेकर काफ़ी अनिश्चितता बनी हुई है. अधिकतर लोगों को तो ये भी समझ में नहीं आ रहा कि इस क़ानून के अंतरगत कैसे चिन्हों पर प्रतिबंध लगेगा. सिख चिंतित हैं सिख इस बात से भी चिंतित हैं कि इसका उनके बच्चों की पढ़ाई पर क्या असर पढ़ेगा. इन लोगों में से अधिकतर फ़्रांस में पिछले दस से बीस वर्षों में ही आए हैं और इसीलिए अन्य अल्पसंख्यकों के मुक़ाबले में उनकी आवाज़ फ़्रांसीसी समाज में ज़्यादा ध्यान से सुनी नहीं जाती. फ़्रांस का सिख समुदाय पूरी तरह निराश तो नहीं है लेकिन उसमें इस मुद्दे पर गंभीर चिंता है. एक सिख छात्र मनप्रीत सिंह को अब भी उम्मीद है कि फ़्रांस की सरकार सिखों के लिए कोई न कोई रास्ता ज़रूर निकाल लेगी. उनका कहना था, "पिछले कुछ दिनों में हमारे समुदाय की अधिकारियों के साथ बातचीत हुई है और हमें विश्वास है कि इस समस्या का कोई न कोई हल निकलेगा." महत्वपूर्ण है कि इस क़ानून में सिखों और उनकी पगड़ी का कोई ज़िक्र नहीं है. एक अन्य छात्र बिक्रमजीत का कहना है, "क़ानून में जहाँ मुसलमानों के हिजाब, ईसाइयों के क्रॉस और यहूदियों की टोपी पर प्रतिबंध है, वहीँ सिखों की पगड़ी के बारे में कुछ नहीं कहा गया है." उनका कहना है कि या तो ये प्रतिबंध सिखों पर लागू नहीं होता या फिर हो सकता है कि उन्हें इस क़ानून में लाने के लिए बाद में कदम उठाए जाएँ. मुसलमान भी चिंतित पाकिस्तानी समुदाय से संबंधित अमजद मियाँ का कहना है, "इस बारे में हमारी राय तो किसी ने भी नहीं पूछी. फ़्रांस में एशियाई मूल के लगभग पचास हज़ार मुसलमान रहते हैं लेकिन इस मुद्दे पर तो हम पूरी प्रक्रिया से बाहर ही रहे." उनका कहना था कि इसके बावजूद उन पर बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उनके समुदाय की लड़कियाँ केवल सर पर चुन्नी ही डालती हैं पूरी तरह हिजाब नहीं पहनतीं. लेकिन उनका कहना था कि देखना होगा कि इस क़ानून को अमल में कैसे लाया जाता है. क़ानून की एक धारा से सिखों और मुसलमानों को कुछ आशा की किरण नज़र आ रही है. ये वो धारा है जिसके तहत प्राध्यापक को छात्र से पहले बातचीत करनी होगी और उसके बाद ही छात्र के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई की जा सकती है. लेकिन अधिकतर सिख छात्रों का ये भी कहना है कि यदि उन्हें अपनी पगड़ी पहनने और स्कूल जाने में किसी एक को चुनना पड़ा तो वे स्कूल जाना बंद कर देंगे लेकिन पगड़ी नहीं छोड़ेंगे. उम्मीद की जा रही है कि भारत की यात्रा पर गए फ्रांस के विदेश मंत्री डोमिनिक द विलेपां की भारत सरकार के साथ बातचीत में इस मुद्दे को उठाया जाएगा. |
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