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'हमें पगड़ी पहनने का अधिकार है'
फ़्रांस में रह रहे पाँच हज़ार सिख फ़्रांस के उस प्रतिबंध से नाराज़ है जो धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर लगाया जा रहा है. वे भारत के प्रधानमंत्री से आग्रह कर रहे हैं कि वह उनकी पारंपरिक पगड़ियों को इस प्रतिबंध से अलग रखने की हिमायत करें. सिख समुदाय के एक प्रवक्ता चैन सिंह ने कहा, "यह क़ानून मुसलमानों के ही नहीं सिखों के भी ख़िलाफ़ है".
"हम पगड़ी पहने बिना नहीं रह सकते. यह हमारे धर्म का हिस्सा हैं. अगर हमारे पगड़ी बांधने पर पाबंदी लगाई गई तो हम यहाँ रह भी नहीं पाएँगे". फ़्रांस के इस क़दम पर मिस्र में भी टकराव की स्थिति पैदा हो गई है जहाँ एक प्रमुख मुस्लिम नेता ने फ़्रांस के फ़ैसले की वकालत करके एक नई बहस छेड़ दी है. अल-अज़हर मस्जिद के प्रमुख शेख़ मोहम्मद सैयद तंतावी ने एक बयान में कह दिया कि वह इस बात से सहमत हैं कि फ़्रांस को यह क़ानून लागू करने का पूरा अधिकार है.
उनका कहना था कि हालाँकि हिजाब करना एक मज़हबी फ़र्ज़ है लेकिन इस्लामी देशों में रहने वाले और ग़ैर-इस्लामी देशों में बसे मुसलमानों पर अलग-अलग तरह के नियम लागू होते हैं. लेकिन मिस्र के सबसे बड़े विपक्षी गुट मुस्लिम ब्रदरहुड ने फ़्रांस के फ़ैसले का विरोध किया है और शेख़ तंतावी के बयानों की यह कह कर आलोचना की है कि वे इस्लामी सिद्धांतों को नुक़सान पहुँचाते हैं. इस बहस की नवीनतम कड़ी में अब मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक भी शामिल हो गए हैं जिन्होंने यह कह कर, एक तरह से. शेख़ तंतावी के रुख़ की हिमायत कर दी है कि यह फ़्रांस का मामला है और मिस्र उसमें दख़लंदाज़ी नहीं कर सकता. |
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