| 'तेरह अप्रैल विश्व पगड़ी दिवस हो' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के सिखों के शीर्ष संस्थान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने दुनिया भर के सिखों से 13 अप्रैल का दिन विश्व पगड़ी दिवस के तौर पर मनाने का आह्वान किया है. एसजीपीसी ने सिखों से कहा है कि वे इस दिन का पालन करके सिख रीतिरिवाजों और परंपराओं की ओर लोगों का ध्यान खींचें. कमेटी के सचिव मंजीत सिंह कलकत्ता ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि इस दिन का मक़सद विशेष रूप से पश्चिमी देशों में रह रहे सिखों के ख़िलाफ़ शक और नफ़रत के बारे में जागरूकता लाना है जो पगड़ी पहनते हैं. ग्यारह सिंतबर के हमलों के बाद से पश्चिम में, विशेषकर अमरीका में रह रहे सिखों को अकसर मुस्लिम कट्टरपंथी समझ कर उनके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है. ऐसी भी घटनाएँ हुई हैं जब कई सिखों पर हमला किया गया और उन्हें जान से मार दिया गया. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का मानना है कि सिखों के ख़िलाफ़ जो भी हिंसा और अविश्वास है वह अज्ञानता का नतीजा है और लोगों को यह बताने की ज़रूरत है कि सिख धर्म आख़िर क्या है. कलकत्ता का कहना है कि फ़्रांस सरकार ने सिखों के पगड़ी पहनने पर जो पाबंदी लगाई है उसकी वजह भी सिख धर्म की परंपराओं और रिवाजों की जानकारी न होना है. तेरह अप्रैल सिखों के प्रमुख त्योहार बैसाखी की पूर्व संध्या है और कहा जाता है कि इसी दिन आधुनिक सिख धर्म या ख़ालसा पंथ की शुरुआत हुई थी. मंजीत सिंह कलकत्ता ने दुनिया भर के सिखों से अनुरोध किया है कि इस दिन वे परंपरागत हाथ से बंधी पगड़ी का इस्तेमाल करें और लोगों को बताएँ कि सिख धर्म में पगड़ी का क्या महत्व है. |
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