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बर्लुस्कोनी भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी चार साल तक चले मुक़दमे के बाद भ्रष्टाचार के आरोपों से मुक्त हो गए हैं. प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी पर आरोप थे कि उन्होंने 1980 के दशक में अपने व्यापारिक हितों के लिए न्यायाधीशों को रिश्वत दी थी. भ्रष्टाचार के एक आरोप में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया और एक अन्य आरोप के बारे में न्यायाधीशों ने कहा कि बहुत समय बीत चुका है इसलिए अभियोग लगाना उचित नहीं होगा. इस मामले में अदालत के फ़ैसले के समय प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी वहाँ मौजूद नहीं थे. फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा- "देर आए, दुरुस्त आए" सरकारी वकीलों ने मांग की थी कि अगर बर्लुस्कोनी दीषी पाए गए तो उन्हें आठ साल की जेल की सज़ा दी जाए. बर्लुस्कोनी इटली के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनके पद पर रहते हुए आपराधिक अदालत में मुक़दमा चलाया गया. बर्लुस्कोनी का आरोप था कि राजनीति से प्रेरित होकर उनके ख़िलाफ़ मामला चलाया जा रहा था. उनके ख़िलाफ़ लगे आरोप उस समय के थे जब उन्होंने राजनीति में प्रवेश नहीं किया था और मामले उनके व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े हुए थे. नैतिक ज़िम्मेदारी 68 वर्षीय प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी को जिस मामले में बरी किया गया है. वह मामला 80 के दशक से जुड़ा हुआ है. उन पर आरोप था कि उन्होंने एसएमई सरकारी खाद्य समूह की बिक्री के मामले में न्यायाधीशों को रिश्वत दी. जबकि 1991 के एक अन्य मामले में अदालत का कहना था कि उसे अब लंबा समय हो चुका है इसलिए अभियोग लगाना ठीक नहीं. बर्लुस्कोनी के आरोप मुक्त होने पर इटली के एक विपक्षी राजनीतिज्ञ और भूतपूर्व वरिष्ठ मजिस्ट्रेट एंटोनियो डि पिएत्रो ने कहा- “अदालत से दूसरे आरोप में बरी न होने का मतलब यह है कि बर्लुस्कोनी को नैतिक आधार पर प्रधानमंत्री नहीं रहना चाहिए.” रोम से बीबीसी के संवाददाता डेविड विली का कहना है कि हालाँकि दूसरे मामले में लंबे समय को आधार बनाकर बरी होना दोषी न पाए जाने के बराबर तो नहीं, लेकिन इससे प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी के राजनैतिक आत्मविश्वास को तोड़ा नहीं जा सकता. बर्लुस्कोनी के एक वकील निकोलो घेडिनी ने कहा- “ यह फ़ैसला कुल मिलाकर संतोषजनक है. इससे दस साल पुराना एक निरर्थक मुक़दमा ख़त्म हो गया है.” प्रधानमंत्री बर्लुस्कोनी इस मामले में चले चार साल मुक़दमे के दौरान सिर्फ़ तीन बार ही अदालत में पेश हुए. उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री के रूप में उनकी ज़िम्मेदारी के कारण उन्हें समय कम मिल पाता है. |
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