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शनिवार, 06 नवंबर, 2004 को 11:26 GMT तक के समाचार
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अराफ़ात की हालत अब भी चिंताजनक
यासिर अराफ़ात
अराफ़ात के स्वास्थ्य पर नज़रे टिकी हैं
पेरिस में इलाज करा रहे फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुआ है और उसमें कोई सुधार नहीं देखा गया है.

इस बीच फ़लस्तीनी नेतृत्व में इस बात पर अब भी रहस्य बना हुआ है कि अगर यासिर अराफ़ात की मौत हो जाती है तो उनकी जगह किस तरह से भरी जाएगी.

अराफ़ात के एक निकट सहयोगी नबील अबू रज़ैनाह ने पत्रकारों को बताया, "डॉक्टरों का कहना है कि उनकी हालत ऐसी नहीं है जो ठीक नहीं हो सके."

हालाँकि अबू रज़ैनाह ने इन ख़बरों पर कोई टिप्पणी नहीं कि अराफ़ात ने रात में अपनी आँखों खोली थीं. एक इसराइली अख़बार की वेबसाइट ने यह ख़बर छापी थी कि अराफ़ात ने रात में आँखें खोली थीं.

ग़ौरतलब है कि अराफ़ात बीते सप्ताह के शुरू में अचेतावस्था में चले गए थे.

अस्पताल के सूत्रों का कहना है कि अराफ़ात सिर्फ़ मशीनों के सहारे पर साँस ले रहे हैं. ऐसी ख़बरें हैं कि उनके परिजनों और निकट सहयोगियों पर इस मुद्दे पर मतभेद हैं कि इस मशीन को कब बंद किया जाए.

सत्ता स्थिति

उधर फ़लस्तीनी अधिकारियों ने इन अटकलों को ख़ारिज कर दिया है कि अगर अराफ़ात की मौत हो जाती है तो वहाँ सत्ता शून्य की स्थिति बन जाएगी और विभिन्न फ़लस्तीनी गुटों में अंदरूनी लड़ाई छिड़ जाएगी.

प्रधानमंत्री अहमद क़ुरैई को अराफ़ात के कुछ अधिकार और ज़िम्मेदारियाँ दी गई हैं और वह एक तरह से फ़लस्तीनी प्रशासनिक प्राधिकरण के अध्यक्ष बन गए हैं.

 येरुशलम एक ऐसा शहर है जहाँ यहूदी अपने राजाओं को दफ़नाते हैं. ये ऐसी जगह नहीं है जहाँ हम एक अरब आतंकवादी को दफ़नाना चाहेंगे.
इसराइली न्याय मंत्री
पूर्व प्रधानमंत्री महमूद अब्बास इस समय फ़लस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) और फ़तह संगठन के मुखिया बने हुए हैं.

फ़तेह संगठन पीएलओ का सबसे बड़ा घटक है और वह अराफ़ात का राजनीतिक संगठन भी है.

लेकिन अभी यह साफ़ नहीं हुआ है कि अराफ़ात की ग़ैरमौजूदगी में किसे ज़िम्मेदारी मिलेगी, हालाँकि आमतौर पर संसदीय अध्यक्ष अस्थाई तौर पर ज़िम्मेदारी संभालेंगे.

फ़लस्तीनी संगठनों के विभिन्न प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर विचार के लिए बैठक की थी कि अगर अराफ़ात की मौत हो जाती है तो क्या होगा.

चरमपंथी संगठन हमास के एक प्रवक्ता मुशीर अल मसरी ने कहा कि यह बैठक राष्ट्रीय एकता मज़बूत करने और "किसी भी तरह के मतभेद और अंदरूनी संघर्ष रोकने" के इरादे से बुलाई गई थी.

फ़लस्तीनी अधिकारियों ने अराफ़ात के अंतिम संस्कार की तैयारियों पर भी कुछ कहने से यह कहते हुए इनकार कर दिया है कि यह ग़ैरज़रूरी है.

अमरीकी समाचार एजेंसी एपी टेलीविज़न ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि वे येरुशलम में अल अक्सा मस्जिद के पास दफ़नाए जाने की अराफ़ात की इच्छा के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने के लिए आशान्वित हैं.

लेकिन इसराइल के न्याय मंत्री यूसुफ़ लापिद ने शुक्रवार को यह विचार ख़ारिज करते हुए कहा, "येरुशलम एक ऐसा शहर है जहाँ यहूदी अपने राजाओं को दफ़नाते हैं. ये ऐसी जगह नहीं है जहाँ हम एक अरब आतंकवादी को दफ़नाना चाहेंगे."

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