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अन्नान की चेतावनी ख़ारिज | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका, ब्रिटेन और इराक़ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान की उस चेतावनी को ख़ारिज कर दिया है कि इराक़ी शहर फ़लूजा पर हमला करने से जनवरी में प्रस्तावित चुनावों पर असर पड़ सकता है. कोफ़ी अन्नान ने इन तीनों देशों को भेजे एक पत्र में कहा था कि फ़लूजा पर हमले से आम इराक़ी लोग अलग-थलग पड़ सकते हैं. लेकिन अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल के एक प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा है कि पॉवेल ने कोफ़ी अन्नान को यह साफ़ कर दिया है कि वह उनसे असहमत हैं. संयुक्त राष्ट्र में बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी अधिकारियों ने गुप्त रूप से इस बात पर कड़ा ऐतराज़ जताया है कि कोफ़ी अन्नान को फ़लूजा पर ऐसी राय ज़ाहिर करनी चाहिए. इन अधिकारियों का मानना है कि ख़ासतौर से ऐसे हालात में जबकि संयुक्त राष्ट्र के बहुत कम लोग स्थिति का मौक़े पर जायज़ा लेने के लिए वहाँ मौजूद हैं. इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने कहा कि कोफ़ी अन्नान का पत्र भ्रामक है और पत्र यह नहीं बताता कि विद्रोहियों के हमलों को कैसे रोका जाए. संयुक्त राष्ट्र में ब्रितानी दूत एम्र जोन्स पैरी ने कहा कि इराक़ी सरकार फ़लूजा जैसे इलाक़े को "आतंकवाद के अड्डे के रूप में काम करने की इजाज़त नहीं दे सकती." सेनाएँ बढ़ीं उधर अमरीकी सेना फ़लूजा के बाहरी इलाके में पहुँच गई है. ज़मीनी सेना को तोपख़ानों और हवाई सेना का भी सहयोग हासिल है.
अमरीकी सेनाओं के साथ चल रहे एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि हमवी जीपों और हल्के बख़्तरबंद वाहनों का एक काफ़िला पौ फटते ही अपने अड्डे से फ़लूजा के पास अपने अड्डे से चल पड़ा था. इससे पहले शुक्रवार की रात को कुछ हवाई हमले किए गए जो देर रात तक जारी रहे. इन्हें किसी बड़े हमले की तैयारी बताया गया. अमरीकी समाचार एजेंसी एपी ने स्थानीय लोगों के हवाले से कहा है कि विमानों ने फ़लूजा के मुख्य बाज़ार में कुछ हमले किए जहाँ पिछले अप्रैल से कोई हमला नहीं हुआ था. हताहतों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीकी सेनाओं ने फ़लूजा में विद्रोहियों के ख़िलाफ़ जब से मोर्चाबंदी कड़ी की है तब से यह बड़ी सैनिक कार्रवाई है. संवाददाता का कहना है कि अधिकारी कह रहे हैं कि फ़लूजा शहर के अंदर घुसा जाए या नहीं, यह फ़ैसला अंतिम रूप में इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी की तरफ़ से आना है, और ताज़ा जानकारी के मुताबिक़ ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने अभी ऐसी इजाज़त दी हो. 'नकारात्मक असर' संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी को लिखे पत्र में इस हमले का राजनीतिक प्रक्रिया पर नकारात्मक असर होने की बात कही है. दूसरी ओर अमरीका का कहना है कि इराक़ में विद्रोहियों से जल्द से जल्द निबटने ज़रूरी है और इसीलिए इस चिट्ठी से अमरीकी अधिकारी नाराज़ हैं.
इराक़ी प्रधानमंत्री ईयाद अलावी का भी कहना है,"ये एक संशय भरा पत्र था. उनके पत्र से जो संदेश मिला वो बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है और न्यूयॉर्क में मौजूद अपने प्रतिनिधि के ज़रिए हम उनसे स्पष्टीकरण माँग रहे हैं. हमें नहीं पता कि उनके पास क्या विकल्प हैं?" यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों से मिलने ब्रसेल्स गए अलावी ने ख़ुद भी इस बात पर ज़ोर दिया और कहा कि इराक़ की सरकार का ही इस बारे में अंतिम फ़ैसला होगा. उनका कहना था,"हमने फ़लूजा के लोगों को वहाँ से आतंकवादियों को निकालने के लिए काफ़ी समय दिया मगर वे ऐसा नहीं कर सके और इस तरह वे हमारा हस्तक्षेप चाह रहे हैं." अमरीकी मरीन सैनिकों का मानना है कि फ़लूजा में कई हज़ार विद्रोही मौजूद हैं. मगर अभी तक ये स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी सेना के सामने ये विद्रोही संघर्ष करेंगे या बस हथियार डाल देंगे और किसी दूसरे शहर की ओर बढ़ जाएँगे. |
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