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सद्दाम हुसैन के मुक़दमे के सबूत 'ग़ायब' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि ऐसी संभावना है कि इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमों के लिए महत्वपूर्ण सबूत या तो ग़ायब हो गए हैं या फिर उनके साथ छेड़ख़ानी की गई है. संगठन ने कहा है कि अमरीका के नेतृत्व वाला गठबंधन पिछले साल हमले के बाद से इराक़ में महत्वपूर्ण ठिकानों को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहा है. संगठन के अनुसार गठबंधन के सैनिक सद्दाम हुसैन शासन के ख़ात्मे के बाद सरकारी इमारतों से हज़ारों महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की लूटपाट को भी नहीं रोक पाए थे. ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि ठोस दस्तावेज़ी और फ़ोरेंसिक सबूत इराक़ में किसी भी मक़दमे के लिए बहुत निर्णायक साबित होंगे और उन्हीं के आधार पर गवाहियाँ भी वज़नदार साबित होंगी. लेकिन संगठन ने साथ ही कहा है कि ऐसी संभावना है कि कुछ सबूत अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन की अनदेखी या कार्रवाई के अभाव की वजह से या तो ग़ायब हो गए हैं या फिर उनके साथ छेड़छाड़ की गई. ह्यूमन राइट्स वॉच का आरोप है कि अप्रेल 2003 में सरकारी इमारतों में लूटपाट को रोकने में गठबंधन की नाकामी की वजह से ही पुरातत्व महत्व की बहुत सी चीज़ें लूट ली गईं जिन्हें वापस लाना असंभव ही नज़र आता है. क़ब्रिस्तान संगठन का कहना है कि कुछ मामलों में तो गठबंधन सैनिक उन क़ब्रों को फिर से खोदे जाते हुए देखते रहे जिन्हें कुछ परिवारों ने उन लोगों की तलाश में खोदा जो सद्दाम हुसैन के शासनकाल में लापता हो गए थे.
संगठन कहता है कि जिस लापरवाह तरीक़े से क़ब्रों को खोदा गया उससे बहुत से लोगों के लिए क़ब्रों में बचे-खुचे निशानों को पहचानना भी मुश्किल हो गया. संगठन ने इराक़ की अंतरिम सरकार से अनुरोध किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर एक ऐसा आयोग गठित करें जो क़ब्रिस्तानों की सुरक्षा कर सके. साथ ही एक अन्य आयोग बनाया जाए जो पूर्व सरकारी दस्तावेज़ों को संभालने की ज़िम्मेदारी निभाए. |
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