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इराक़ नीति पर उठे सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अब जबकि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में महीने भर से भी कम समय रह गया है, इराक़ संकट को लेकर बहस एक बार फिर ज़ोर पकड़ रही है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यु बुश के दो क़रीबी लोगों ने युद्ध के लिए गिनाए गए कारणों और इराक़ युद्ध की रणनीति को लेकर नए बयान दिए हैं जिनसे एक बार फिर युद्ध के सही-ग़लत होने को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं. राष्ट्रपति बुश के जिन दो सहयोगियों के नए बयान सामने आए हैं उनमें एक हैं रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड और इराक़ में अमरीका के पूर्व प्रशासक पॉल ब्रेमर. रम्सफ़ेल्ड ने इराक़ के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन और अल क़ायदा के बीच किसी तरह का संबंध होने पर संदेह व्यक्त किया है. अमरीका ने इराक़ पर हमला करने से पहले जो कारण गिनाए थे, उनमें एक कारण यह भी था कि सद्दाम हुसैन और अल क़ायदा के बीच संबंध थे. उधर इराक़ में पूर्व अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने कहा है कि इराक़ पर हमले से पहले वहाँ अमरीका के पास पर्याप्त सैनिक नहीं थे. ब्रेमर ने कहा कि इस कारण से बड़े पैमाने पर वहाँ लूट-पाट हुई और बाद में स्थिति अराजक बन गई. पुख़्ता संबंध नहीं डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड ने न्यूयॉर्क में विदेशी संबंध परिषद के एक कार्यक्रम के दौरान सद्दाम हुसैन और अल क़ायदा के बीच संबंध की बात पूछी गई. उन्होंने पहले कहा," , " मैंने महसूस किया है कि इस सवाल का जवाब गुप्तचर हलकों में एक साल से भी ज़्यादा समय से एक अनोखे अंदाज़ में मँडरा रहा है." इसके बाद आगे उन्होंने कहा," मेरी जो जानकारी है उसके अनुसार मैने दोनों के बीच संबंध के पुख़्ता सबूत नहीं देखे हैं." हालाँकि पहले रक्षा मंत्री रम्सफ़ेल्ड इन दोनों के बीच संपर्क की पुख़्ता सूचना की बात कह चुके हैं. उप राष्ट्रपति डिक चेनी ने तो यहाँ तक कहा है कि सद्दाम हुसैन अल क़ायदा के सदस्यों को अपने यहाँ शरण देते थे. वाशिंगटन से बीबीसी संवाददाता जस्टिन वेब का कहना है कि रक्षा मंत्री रम्सफ़ेल्ड के ऐसे बयान अक्सर चौंकाने वाले होते हैं. लेकिन वाकई अगर उनके बयान का वही मतलब है जो उन्होंने कहा है तो इससे यही स्पष्ट होता है कि बुश प्रशासन अपने पहले वाले रुख़ से पीछे हटने की तैयारी में है. अनुमान ग़लत अमरीका के अख़बार वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इराक़ में सद्दाम हुसैन की सत्ता के पतन के बाद की स्थिति को लेकर लगाए गए अनुमान ग़लत निकले. ब्रेमर ने कहा कि ध्यान हिंसा और चरमपंथ की समस्या की जगह मानवीय राहत कार्यों और शरणार्थी समस्या पर केंद्रित किया गया. वैसे बाद में एक बयान में पॉल ब्रेमर ने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन्होंने इराक़ी सुरक्षाबलों को प्रशिक्षण देने और इराक़ के बारे में पूरी रणनीति को लेकर बुश की योजना का पूरा समर्थन किया. |
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