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बर्मा के प्रधानमंत्री पद से हटाए गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इस तरह की ख़बरें मिल रही हैं कि बर्मा के प्रधानमंत्री खिन न्यून्त को उनके पद से हटा दिया गया है. थाईलैंड सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि खिन न्यून्त पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है और उन्हें नज़रबंद कर दिया गया है. इस बारे में अभी तक बर्मा में सरकारी तौर पर कुछ नहीं कहा गया है. राजनयिकों ने वैसे सैन्य प्रशासन में तीसरे नंबर पर रहने वाले खिन न्यून्त और वरिष्ठ जनरल थान सू के बीच बढ़ते सत्ता संघर्ष की ओर संकेत किया है. बीबीसी की दक्षिण पूर्व एशिया संवाददाता काइली मॉरिस के अनुसार ऐसा लगता है कि बर्मा में कट्टरपंथी शक्तियों का दबदबा साबित हो गया है. प्रधानमंत्री के तौर पर खिन न्यून्त को अपनी ताक़त बनाए रखने के लिए बर्मा की ख़ुफ़िया पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन सेना के प्रमुख धडों की निष्ठा सेना प्रमुख जनरल थान सू और उनके नंबर दो मॉंग ऐये के साथ थी. सेना के ऊपरी हलक़ों में बढ़ते मतभेदों के बीच पिछले महीने मंत्रिमंडल में फेरबदल हुई जिसमें तथाकथित कट्टरपंथियों को महत्वपूर्ण पद दे दिए गए और वे लोग पीछे रह गए जो खिन न्यून्त की तरह नरमपंथी माने जाते थे. नतीजतन, खिन न्यून्त की स्थिति कमज़ोर होती गई और अब यह पूरी तरह ज़ाहिर होता जा रहा है कि कट्टरपंथियों का बोलबाला है. खिन न्यून्त के बारे में यह भी माना जाता था कि वह ऑंग सान सू ची के साथ बातचीत को समर्थन देते हैं. अपनी नियुक्ति के तुरंत बाद उन्होंने लोकतंत्र के लिए एक सात-सूत्रीय रोडमैप को मंज़ूरी दे दी थी. लेकिन थान सू ऑंग सान सूची को कोई भी भूमिका देने के सख़्त ख़िलाफ़ थे. |
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