|
गिनी में 'अल क़ायदा' चाय की धूम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़्रीकी देश गिनी में इन दिनों एक नए चाय की धूम है. चाय भी ऐसी वैसी नहीं 'अल क़ायदा' चाय. 'अल क़ायदा' चाय का नाम सुनकर आप भी डर तो नहीं गए. घबराने की कोई बात नहीं. यह चाय अल क़ायदा का उत्पादन नहीं और न हीं इसे पीने में कोई ख़तरा है. लेकिन इस चाय के इस ख़ास नाम ने इसे खूब चर्चित ज़रूर कर दिया है. देश की राजधानी कोनकरी में इस चाय ने सबको दीवाना बना दिया है. शाम से शुरू होकर देर रात तक चलने वाली पार्टियों में भी लोग इस 'विस्फोटक चाय' का जम कर लुत्फ़ उठा रहे हैं. कोनकरी में एक दूकान के मालिक अज़ीज़ मोउना कमारा बताते हैं इस पेय पदार्थ का नाम 'अल क़ायदा' रखे जाने का कारण. वे बताते हैं, "इस पेय पदार्थ को कुछ देर तक उबालने के बाद जब बर्तन खोला जाता है तो इसमें से किसी विस्फोटक के तरह की आवाज़ निकलती है." अज़ीज़ का कहना है कि इसके विस्फोटक जैसी आवाज़ के कारण कुछ लोग इसे बी-52, अमरीकी बमबारी, बिन लादेन और कुछ लोग अल क़ायदा जैसे नाम से पुकारते हैं. 'सद्दाम चाय' पहले इस चाय को 'ट्रेज़र डी ला मेर' यानी समुद्री खज़ाना कहते थे लेकिन जब से इसे अल क़ायदा नाम दिया गया है इसकी खपत बढ़ गई है. गिनी के पड़ोसी देश माली और सेनेगल में भी कुछ इसी तरह का ट्रेंड है जहाँ लोगों ने एक लोकप्रिय मीठी चाय को 'सद्दाम' का नाम दिया है. अज़ीज़ कमारा बताते हैं कि अल क़ायदा नाम की चाय में एक स्थानीय जड़ी-बूटी कैनकलिबा, शहद, चीनी और चायपत्ती का इस्तेमाल होता है. इसे मिलाकर बने पदार्थ को आठ दिन बाद पीने लायक माना जाता है.
अल क़ायदा चाय पीने के बाद कुछ लोग अपने को सद्दाम हुसैन कहते हैं. इन्हीं में से एक है जिब्रिल फ़ोफ़ाना को एक दिन में पाँच लीटर अल क़ायदा चाय पी लेते हैं. फ़ोफ़ाना कहते हैं, "मेरा नाम जिब्रिल फ़ोफ़ाना उर्फ़ सद्दाम हुसैन है. हम हमेशा यहाँ आकर अच्छा समय व्यतीत करते हैं. मैं यहाँ दो लीटर अल क़ायदा चाय पीता हूँ और तीन लीटर घर लेकर जाता हूँ." कुछ लोग इस अल क़ायदा चाय की गुणों का भी बखान करते हैं. इस चाय के शौकीन एक व्यक्ति का कहना है कि पहले मेरे पेट में गड़बड़ी रहती थी लेकिन इस चाय का नियमित सेवन करने के बाद मैं राहत महसूस कर रहा हूँ. अब यह चाय का गुण है या इसके नाम का ख़ौफ़ कि इससे लोगों की कथित बीमारियाँ दूर हो रहीं है- यह तो नहीं पता. लेकिन इतना तो ज़रूर है कि इस चाय के अनोखे नाम ने इसे ज़रूरत से ज़्यादा लोकप्रिय बना दिया है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||