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'हिंसा के बावजूद चुनाव जनवरी में ही हों' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ के कई शहरों में अमरीकी सेना और विद्रोहियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में मारे जाने वालों की संख्या बढ़कर 60 हो गई है. इराक़ के अंतरिम प्रधानमंत्री ईयाद अलावी ने कहा है कि हिंसा के वाबजूद वे चाहते हैं कि जनवरी में होने वाले चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही करवाए जाएँ. एक ब्रितानी अख़बार को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "चाहे हिंसा के कारण जनवरी में कुछ लोगों को मतदान में भाग लेने से रोका ही क्यों न जाए लेकिन ज़रूरी है कि इराक़ में राजनीतिक प्रक्रिया जारी रहे." ताज़ा लड़ाई में इराक़ में सत्ता हस्तांतरण के बाद बग़दाद में सबसे भीषण संघर्ष हुआ है और मारे जाने वाले भी अधिकतर बग़दाद से ही है. अमरीकी सेना की इराक़ में मौजूदगी का विरोध करने वाले विद्रोहियों ने रॉकेट और तोप के गोलों से एक बड़ी सरकारी परिसर पर हमला किया है. इस परिसर में अमरीकी दूतावास भी स्थिति है. सबसे ज़्यादा सुरक्षित माने जाने वाले बग़दाद के 'ग्रीन ज़ोन' में कई घंटे तक लड़ाई चलती रही और अमरीकी सैनिक हेलिकॉप्टरों ने शहर में कम से कम दो जगहों को मिसाइलों का निशाना बनाया. बग़दाद के पश्चिम में स्थित रमादी शहर में अमरीकी सैनिकों और विद्रोहियों के बीच हुई झड़पों में दस लोगों के मारे जाने की ख़बर है. विद्रोहियों ने इराक़ के उत्तरी भाग में स्थित तेल के कूँओं पर हमले किए. हिल्ला शहर के पास घात लगाकर किए गए हमले में पोलैंड के तीन सैनिक मारे गए. लेकिन पोलैंड के राष्ट्रपति एलक्सांडर क्वासनेविस्की ने घोषणा की है कि इस घटना के बावजूद उनके देश की सेनाएँ इराक़ में बनी रहेंगी. उधर अमरीकी विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने कहा है कि अमरीकी और इराक़ी सुरक्षा बल इस विद्रोह पर काबू पा लेंगे. उन्होंने एनबीसी टीवी को बताया, "ये मुश्किलों का समय है क्योंकि विद्रोह चल रहा है और हम उस पर काबू पाने की कोशिश में जुटे हैं. लेकिन हम अंत में इस विद्रोह पर काबू पा ही लेंगे." |
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