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गुरुवार, 29 जुलाई, 2004 को 02:32 GMT तक के समाचार
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हमले की कड़ी निंदा की अमरीका ने
बाक़ूबा हमले में घायल
हमले में हताहत हुए ज़्यादातर लोग नौजवान थे
अमरीकी राष्ट्रपति भवन ने इराक़ में आत्मघाती बम हमले में 68 लोगों के मारे जाने की घटना की कड़ी भर्त्सना की है और कहा है कि ऐसी वारदातों से देश के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया पटरी से नहीं उतरेगी.

अब से एक महीने पहले इराक़ का नियंत्रण इराक़ी हाथों में सौंपे जाने के बाद से यह हिंसा की यह सबसे बड़ी घटना थी.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ट्रेंट डफी ने इस हमले को "दुखद त्रासदी" बताया और कहा कि उनकी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवारों के साथ हैं.

उन्होंने कहा, "इससे यह बात एक बार फिर साबित होती है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ दुनिया के अन्य देशों की मदद से इराक़ की जनता की जीत कितनी अहम है."

दूसरी ओर, इराक़ के पड़ोसी देश सऊदी अरब में अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं कि अरब और मुस्लिम देश किस हद तक इराक़ में स्थायित्व बहाल करने में सैनिक मदद करने को तैयार हैं.

 इससे यह बात एक बार फिर साबित होती है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ दुनिया के अन्य देशों की मदद से इराक़ की जनता की जीत कितनी अहम है
व्हाइट हाउस प्रवक्ता

सऊदी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत अभी शुरूआती दौर में है और किसी तरह की सहमति अभी नहीं बन पाई है.

सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले दो हफ़्तों से इस पर विचार किया जा रहा है और कई इस्लामिक देशों से पूछा भी गया है कि क्या वो अपने सैनिक भेजने को राज़ी होंगे.

लेकिन इनमें इराक़ का कोई पड़ोसी देश शामिल नहीं है. संयुक्त राष्ट्र और इराक़ी नेताओं के साथ भी बात हुई है लेकिन अभी कुछ तय नहीं हो पाया है.

बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि ये सुरक्षा बल किसके अधीन काम करता है. अमरीका के अधीन शायद ही कोई मुस्लिम देश अपने सैनिक तैनात करना चाहे.

लेकिन अगर मुस्लिम सेना की तैनाती से अमरीकी सेना की निकासी होती हो तो बात और है. अमरीकी जनता भी यही चाहेगी कि उनके सैनिक जल्दी से जल्दी इराक़ से लौट आएँ.

हमला

पुलिस का कहना है कि बुधवार की सुबह विस्फोटकों से भरी एक कार बक़ूबा के अल नजदा थाने की दीवार से टकराई जिसके बाद ज़बर्दस्त विस्फोट हुआ.

विस्फोट के समय वहाँ काफ़ी भीड़ थी क्योंकि बहुत से युवक पुलिस में भर्ती होने के लिए एकत्र थे.

एक मिनी बस विस्फोट की चपेट में आ गई जिससे उसमें बैठे 20 से भी अधिक लोग मारे गए.

अमरीकी नेतृत्व वाले गठबंधन के ख़िलाफ़ बक़ूबा में अक्सर हमले होते रहते हैं और पहले भी थानों को निशाना बनाया जाता रहा है.

चूँकि इराक़ी पुलिस के पास अमरीकी गठबंधन के सैनिकों जैसे अत्याधुनिक हथियार नहीं हैं इसलिए उन पर हमला करना आसान समझा जाता है.

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