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क़ुरई ने इस्तीफ़ा वापस लिया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीन के प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने यासिर अराफ़ात से मुलाक़ात के बाद इस्तीफ़ा वापस ले लिया है. इस तरह फ़लस्तीनी सुरक्षा और ख़ुफ़िया सेवाओं पर अधिकार को लेकर चल रहा दो सप्ताह पुराना गतिरोध समाप्त हो गया है. ग़ज़ा में पिछले दिनों काफ़ी संघर्ष हुआ है. इस बीच दोनों नेताओं की मुलाक़ात के दौरान मौजूद रहे कैबिनेट मंत्रियों का कहना है कि अराफ़ात पुलिस बल क़ुरई को सौंपने के लिए राज़ी हो गए हैं. वैसे संवाददाताओं का कहना है कि ये वायदा तो पहले भी किया गया था मगर पूरा कभी नहीं किया गया. अब भी फ़लस्तीन की प्रभावी सुरक्षा संस्थाएँ, ख़ुफ़िया सेवाएँ और राष्ट्रीय सुरक्षा सेवाएँ अराफ़ात के ही नियंत्रण में हैं. क़ुरई ने रमल्ला में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह इस्तीफ़ा नहीं देने की अराफ़ात की इच्छा मानने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति अराफ़ात ने मेरा इस्तीफ़ा अस्वीकार करके मुझमें विश्वास जताया है. मैं उनके विश्वास की क़द्र करता हूँ इसलिए अपनी भूमिका निभाता रहूँगा." उनका कहना था, "मुझे उम्मीद है कि हम एकजुट होकर बेहतर काम कर सकेंगे." |
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