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क़ुरई पद पर बने रहने को राज़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने इस्तीफ़ा देने के तीन दिन बाद अब फ़िलहाल पद पर बने रहने का फ़ैसला किया है. अहमद क़ुरई ने इस्तीफ़ा स्वीकार नहीं करने का फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात का अनुरोध मान लिया है. कुरई लगातार ज़ोर दे रहे थे कि ग़ज़ा में क़ानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और सुधारों की दिशा में कोई काम नहीं होने की वजह से वह इस्तीफ़ा देना चाहते हैं. फ़लस्तीनी नेतृत्व इस संकट में है कि सुरक्षा और ख़ुफ़िया सेवाओं का नेतृत्व किस के पास हो. अराफ़ात के एक सलाहकार नबील अबू रुदाइनेह ने संवाददाताओं को बताया कि रामल्ला स्थित अराफ़ात के मुख्यालय पर हुई कैबिनेट की एक आपात बैठक में क़ुरई ने पद पर बने रहने का फ़ैसला किया. नबील अबू रुदाइनेह ने कहा, "वह प्रधानमंत्री हैं और वह प्रधानमंत्री के पद पर बने रहेंगे." मगर बैठक में मौजूद कुछ अन्य अधिकारियों का कहना था कि क़ुरई कुछ ही समय के लिए पद पर बने रहने के लिए तैयार हुए हैं. बैठक के बाद क़ुरई संवाददाताओं से बचते हुए पिछले दरवाज़े से निकल गए. पिछले दिनों चरमपंथियों ने सुरक्षा बलों में भ्रष्टाचार ख़त्म करने की माँग की थी और इसी क्रम में हुए संघर्ष के बाद ग़ज़ा में स्थिति काफ़ी बिगड़ गई थी. |
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