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मंगलवार, 20 जुलाई, 2004 को 00:54 GMT तक के समाचार
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अराफ़ात से कोफ़ी अन्नान की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान
कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि अराफ़ात को ठोस क़दम उठाकर हालात संभालने की कोशिश करनी चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात से अपील की है कि वे अपनी सरकार की बात सुनें.

फ़लस्तीन में राजनीतिक संकट को गंभीर बताते हुए उन्होंने वहाँ सुरक्षा ढांचे में फेरबदल कर उसे एक केंद्रीय कमान के नीचे लाने की बात कही है.

उधर अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी कहा है कि फ़लस्तीनी प्रशासन को अपनी सुरक्षा सेवा को मज़बूत कर 'आतंकवाद' का सामना करना चाहिए.

उधर इसराइली हेलिकॉप्टरों ने गज़ा शहर में राहत शिविर में एक घर पर मिसाइल दागे हैं जिससे पाँच लोग घायल हो गए हैं.

'गंभीर संकट'

संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी उन लोगों की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिला दी है जो अराफ़ात से फ़लस्तीनी लोगों के बीच भड़की हिंसा को रोकने के लिए कुछ ठोस क़दम उठाने की माँग कर रहे हैं.

 अब चेयरमैन अराफ़ात को अपने प्रधानमंत्री और दूसरे वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेताओं की बात ध्यान से सुननी चाहिए और ऐसे क़दम उठाने चाहिए जिससे हालात संभलें
कोफ़ी अन्नान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा, "अहम बात ये है कि वहाँ हालात काफ़ी गंभीर हैं, बल्कि संकट काफ़ी गंभीर है, और उन्हें हालात पर काबू पाने के लिए क़दम उठाने पड़ेंगे."

उनका कहना था कि ख़ुद प्रधानमंत्री के बीच में आने से बात और गंभीर हो गई है.

उन्होंने कहा, "अब चेयरमैन अराफ़ात को अपने प्रधानमंत्री और दूसरे वरिष्ठ फ़लस्तीनी नेताओं की बात ध्यान से सुननी चाहिए और ऐसे क़दम उठाने चाहिए जिससे हालात संभलें."

कोफ़ी अन्नान का कहना था कि अब अराफ़ात को मिस्र, जॉर्डन और बाक़ी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के साथ मिलकर अपने सुरक्षा ढांचे में सुधार पर चर्चा करनी चाहिए.

इस बीच फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने अपने रिश्तेदार मूसा अराफ़ात को सुरक्षा प्रमुख बनाने का फ़ैसला वापस ले लिया है और फिर पुराना सुरक्षा प्रमुख अब्दुल रज़ेक मजैदी को वापस इस पद पर बहाल किया है.

उन्हें दो दिन पहले हटाया गया था, और उनकी जगह मूसा अराफ़ात की नियुक्ति से ही ये पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया था.

क़ुरई अड़े

अहमद कुरई और यासिर अराफ़ात
अहमद कुरई और यासिर अराफ़ात के बीच मतभेद बरक़रार हैं.

लेकिन अब बात उससे काफ़ी आगे बढ़ चुकी है क्योंकि प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई अपना इस्तीफ़ा वापस न लेने पर अड़े हुए हैं और यासिर अराफ़ात उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर न करने पर.

फ़लस्तीनी कैबिनेट की एक आपात बैठक में क़ुरई को मनाने की सारी कोशिशें बेकार रहीं.

लेकिन मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रधानमंत्री क़ुरई ने इतना ज़रूर कहा कि गज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी सुरक्षा कर्मियों और चरमपंथियों के बीच चल रहा टकराव तुरंत बंद होना चाहिए क्योंकि ये सिर्फ़ 'दुश्मनों' को ही फ़ायदा पहुंचा रहा है.

मगर मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस बात पर आम राय थी कि फ़लस्तीनी सुरक्षा ढांचे में फेरबदल ज़रूरी है, जिसमें अभी तक मुख्य रूप से यासिर अराफ़ात के संगठन फ़तह के लोग ही शामिल हैं.

मुख्य रूप से आम राय ये है कि अराफ़ात सुरक्षा ढांचे की कमान प्रधानमंत्री कुरई को सौंप दें.

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