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इराक़ियों के पास पहुँचे 80 लाख हथियार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र का नया एक सर्वेक्षण बताता है कि अमरीकी नेतृत्व में हुए हमलों के बाद से इराक़ में अस्सी लाख हथियार लोगों के पास पहुँच गए हैं. छोटे हथियारों को लेकर जिनेवा इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ ने इस सर्वेक्षण के बाद कहा है कि इन हथियारों से न केवल इराक़ में बल्कि पूरे मध्यपूर्व में अस्थिरता का ख़तरा पैदा हो गया है. इराक़ एक ऐसा राज्य था जिसके पास अपनी एक साधन सम्पन्न सेना थी. यह राज्य रातोंरात एक ऐसे देश में तब्दील हो गया जहाँ कोई सेना नहीं थी और अस्सी लाख ऐसे हथियार थे, जिसका प्रत्यक्ष रुप से कोई मालिक नहीं था. ये हथियार जिनमें पिस्तौल थे, मशीनगन थे और पोर्टेबल टैंक-रोधी रॉकेट थे, लोगों के हाथों में चले गए. इससे इराक़ में स्थिति सामान्य करने में तो दिक्क़त तो आ ही रही है वहाँ बंदूक के बल पर लूट, हत्या और अन्य आपराधिक घटनाएँ बढ़ीं हैं. सर्वेक्षण करने वालों का कहना है कि इराक़ की भौगोलिक परिस्थिति ऐसी है कि वहाँ से हथियार आसानी से पड़ोस के देशों में ले जाए जा सकते हैं. संस्था का कहना है कि इससे आने वाले कई बरसों तक मध्यपूर्व में अस्थिरता का ख़तरा पैदा हो गया है. सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि अब आम नागरिकों से हथियार वापस लेने की कार्रवाई की जा रही है वह बहुत छोटी कार्रवाई है और अब इसमें बहुत देर हो चुकी है. यह सर्वेक्षण संयुक्त राष्ट्र के हथियारों के अवैध व्यवसाय से निपटने के कार्यक्रम का एक हिस्सा था. |
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