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सोमवार, 28 जून, 2004 को 06:51 GMT तक के समाचार
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इराक़ में प्रशिक्षण देने का नैटो का प्रस्ताव
इराक़ी सुरक्षा बल
इराक़ में तीस जून को सत्ता का हस्तांतरण किया गया था
नैटो के नेता सोमवार को तुर्की में एकत्रित हो रहे हैं. संभावना है कि वे इराक़ी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देने की योजना को स्वीकृति दे देंगे.

राष्ट्र प्रमुखों के एकत्रित होने से पहले नैटो के राजदूत इस्तांबुल में मिले थे और उन्होंने एक प्रस्ताव तैयार किया है जिसमें कहा गया है कि नैटो इराक़ के सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण देगा.

यह प्रस्ताव इराक़ के प्रधानमंत्री ईयाद अलावी के अनुरोध के बाद तैयार किया गया है.

नैटो के महासचिव का कहना है कि गठबंधन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस सप्ताह इराक़ में सत्ता हस्तांतरण के बाद वहाँ सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे.

संवाददाताओं का कहना है कि नैटो के सदस्य देश इस मामले में एकजुट दिखना चाहते हैं.

दो दिनों के नैटो सम्मेलन की पूर्व संध्या पर नैटो के प्रमुख जाप दी हूप शेफ़र ने चेतावनी देते हुए कहा है अंतरराष्ट्रीय समुदाय 30 जून के बाद इराक़ को झुलसता हुआ नहीं छोड़ सकता.

महासचिव ने कहा, "आमतौर पर इस बात पर सहमति है कि इराक़ में स्थिरता सभी सहयोगी देशों के हित में है."

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशिक्षण का काम कब शुरु होगा और इसमें कितने लोग शामिल होंगे.

मतभेद क़ायम

हालांकि नैटो के 16 सदस्य देशों की सेना ने इराक़ पर हमले में भाग लिया था लेकिन पहली बार सहयोगी देश कोई अधिकृत क़दम उठाने जा रहे हैं.

इससे पहले अमरीका ने इराक़ में शांति सेना के रुप में सहयोगी देशों की जिस भूमिका का प्रस्ताव किया था उसे इराक़ी नेताओं ने ख़ारिज कर दिया था.

हालांकि इराक़ पर हमले के विरोध में रहे फ़्रांस जैसे देश अभी भी कह रहे हैं कि नैटो की इराक़ में कोई सक्रिय भूमिका नहीं होनी चाहिए.

उनका कहना है कि इराक़ में नैटो का झंडा दिखना ही नहीं चाहिए.

लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इस सम्मेलन का उद्देश्य यही है कि इराक़ के मसलों पर आपसी मतभेदों के बावजूद किसी तरह नैटो के सदस्य देश एकजुटता क़ायम रख सकें.

संसाधन का सवाल

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मारकस का कहना है कि इस सम्मेलन से एक और मूलभूत सवाल पर बहस की शुरुआत होने जा रही है कि नैटो का ख़र्च कैसे बाँटा जाए और इसकी सैन्य गतिविधियाँ किस तरह की होंगी.

नैटो के सामने एक बड़ा सवाल यह है कि सहयोगी देश उसे उसकी क्षमता से ज़्यादा ज़िम्मेदारी दे रहे हैं. जैसे कि अफ़ग़ानिस्तान में दिया गया है.

बीबीसी के संवाददाता का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में काम करने और अपनी सैन्य क्षमता के विस्तार के लिए नैटो को संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ा है.

हालांकि अब सदस्य देशों की ओर से वहाँ नैटो को मज़बूत करने को हरी झंडी मिलने वाली है.

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