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'पाक के रवैए से ओसामा को मदद मिली' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग्यारह सितंबर के हमले की जाँच करने वाले आयोग ने कहा है कि पाकिस्तान के रवैए से तालेबान को मदद मिली थी जिसने ओसामा बिन लादेन को छिपाया था. आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार उन कुछ सरकारों में से एक थी जिसके तालेबान शासकों के साथ कूटनीतिक संबंध थे. आयोग की रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि कश्मीर में भारत के ख़िलाफ़ लड़ने वाले कई लड़ाकों को ओसामा बिन लादेन के प्रशिक्षण शिविरों में तैयार किया गया था. अमरीका ओसामा बिन लादेन को ग्यारह सितंबर के हमलों के लिए ज़िम्मेदार मानता है जिन्हें तालेबान शासन ने अफ़ग़ानिस्तान में शरण दी थी. 'इराक़ी मदद नहीं' इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जिनके आधार पर कहा जा सके कि इराक़ ने अल क़ायदा की मदद की थी. आयोग की प्राथमिक रिपोर्ट कई लोगों के साक्षात्कारों के बाद तैयार की गई है. इसके अनुसार ओसामा बिन लादेन इराक़ की धर्मनिरपेक्ष सरकार के विरोधी होने के बावजूद 1994 में एक उच्चस्तरीय इराक़ी अधिकारी से सूडान में मिले थे.
लेकिन लगता है कि इराक़ ने उनके वहाँ प्रशिक्षण शिविर लगाने के अनुरोध पर कोई ध्यान नहीं दिया. चाहे दोनो पक्षों के बीच इसके बाद भी संपर्क बना रहा हो लेकिन ऐसा लगता है कि अल क़ायदा और इराक़ के बीच कभी सहयोग करने का रिश्ता कायम नहीं हो पाया. अंतिम सुनवाई ये बयान उस समय जारी किया गया है जब आयोग इस संबंध में अंतिम सुनवाई करेगा जो दो दिन तक चलेगी. इस सुनवाई में ध्यान इस विषय पर केंद्रित होगा कि हमले की योजना किस तरह बनी और अमरीकी सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया थी. अप्रैल में आयोग के सदस्यों ने राष्ट्रपति जॉर्ज बुश और उपराष्ट्रपति डिक चेनी से इस विषय में बातचीत की थी. इस आयोग की अंतिम रिपोर्ट 28 जुलाई को आएगी. |
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