|
जॉर्ज बुश की विदेश नीति की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की इराक़ नीति को लेकर अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर घरेलू मोर्चे पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है. अमरीका के कई वरिष्ठ पूर्व कूटनीतिज्ञों का एक समूह इसी सप्ताह राष्ट्रपति बुश की विदेश नीति की आलोचना करने के लिए एक वक्तव्य जारी करने वाला है. इस समूह ने अपने लिए नाम चुना है "डिप्लोमैट्स एंड मिलीटरी कमांडर्स फॉर चेंज" यानी परिवर्तन के लिए प्रयासरत कूटनीतिज्ञ और सैनिक कमांडर. अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति बुश की नीतियों की वजह से अमरीका अलग थलग पड़ गया है और देश के लिए ख़तरा बड़ गया है. राष्ट्रपति बुश की आलोचना में अमरीका के पूर्व प्रशासन के कई प्रमुख अधिकारियों के नाम जुड़ गए हैं. मगर इस बार ग़ौरतलब बात यह है कि इन अधिकारियों में कई बड़े सम्मानित लोग शामिल हैं. मिसाल के तौर पर विलियम क्रो जो अमरीका के सेना प्रमुख रह चुके हैं और एडमिरल स्टैन्सफ़ील्ड टर्नर जो अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी निदेशक रह चुके हैं. इस गुट के वक्तव्य में कहा गया है कि बुश प्रशासन ने दुनिया में अमरीका की साख को चोट पहुंचाई है और अंतरराष्ट्रीय संतुलन को बिगाड़ा है. इस वक्तव्य पर हस्ताक्षर करने वाले एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बुश प्रशासन देश के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाने में नाक़ामयाब रहा है. इस वक्तव्य की एक ख़ास बात यह भी है कि इस पर हस्ताक्षर करने वालों में डेमोक्रेट नेताओं के साथ साथ राष्ट्रपति बुश की रिपब्लिकन पार्टी के लोग भी शामिल हैं. वॉशिंगटन से बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इसे प्रशासकीय विशेषज्ञों के विद्रोह की नई कड़ी के तहत देखा जा रहा है और आने वाले चुनावों में निश्चय ही इस दस्तावेज़ को राष्ट्रपति बुश के ख़िलाफ़ हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||