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सीआईए: एक और अधिकारी का इस्तीफ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका की खुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट के इस्तीफ़े के बाद अब एक और वरिष्ठ अधिकारी ने भी सीआईए से इस्तीफ़ा दे दिया है. विभिन्न कार्रवाइयों के उपनिदेशक जेम्स पेविट ने ये फ़ैसला किया है. वह एजेंसी के जासूसों के मामलों के प्रभारी थे और बताया जा रहा है कि उन्होंने ये फ़ैसला कुछ सप्ताह पहले ही कर लिया था. सीआईए का कहना है कि पेविट के फ़ैसले का टेनेट के इस्तीफ़े से कोई संबंध नहीं है. मगर विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे महत्त्वपूर्ण समय में ये इस्तीफ़ा मुश्किलें ही खड़ा करेगा. इससे पहले सीआई के प्रमुख जॉर्ज टेनेट के इस्तीफ़े की घोषणा राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ख़ुद की और कहा कि उन्होंने इस्तीफ़ा 'निजी कारणों' से दिया है. टेनेट पिछले सात वर्षों से दुनिया की सबसे बड़ी और शक्तिशाली माने जाने वाली ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख के पद पर थे. वे जुलाई महीने में अपने पद से हटेंगे और उनका कार्यभार जॉन मैकलुग्लिन संभालेंगे. राष्ट्रपति बुश ने कहा कि उन्हें टेनेट के पद छोड़ने का अफ़सोस है लेकिन उन्होंने सिर्फ़ इतना ही कहा कि यह फ़ैसला निजी कारणों से लिया गया है.
जेम्स पेविट 31 वर्षों से एजेंसी के साथ काम कर रहे थे और वह पाँच वर्षों से उपनिदेशक के पद पर थे. वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता इयान पनेल का कहना है कि पेविट के ही विभाग पर इराक़ की ख़ुफ़िया जानकारी के संदर्भ में सबसे ज़्यादा उंगलियाँ उठ रही थीं. कहा जा रहा था कि विभाग ने ग़लत स्रोत की जानकारियों पर ज़्यादा विश्वास किया न कि ज़मीनी ख़ुफ़िया जानकारी पर. सीआईए के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि पद छोड़ने का पेविट का फ़ैसला एक तरह से सेवानिवृत्ति है न कि इस्तीफ़ा. ये भी कहा गया है कि ये टेनेट के इस्तीफ़े से किसी भी तरह जुड़ा हुआ नहीं है. मगर इस्तीफ़े के लिए जो समय चुना गया है वह निश्चित रूप से ही ग़लत है और आलोचक इसे सीआईए के संकट के रूप में ही पेश करेंगे. |
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