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प्रभावशाली ख़ुफ़िया अधिकारी टेनेट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉर्ज टेनेट का इस्तीफ़ा क़रीब एक साल के उस दबाव के बाद आया जिसका सामना वह इराक़ की ख़ुफ़िया सूचनाओं के बारे में उठे विवाद में कर रहे थे. सीआईए को मिलने वाली ख़ुफ़िया सूचनाओं की गुणवत्ता का सवाल बहुत ज़ोरदार तरीक़े से उठाया गया जिससे यह ख़ुफिया एजेंसी कड़ी निगरानी में आ गई. मुख्य मुद्दा रहा 11 सितंबर 2001 के हमलों को रोक पाने में नाकामी और इराक़ में महाविनाश के हथियारों के बारे में सूचनाएं हासिल नहीं कर पाना. राष्ट्रपति जॉर्ज बुश सीआईए निदेशक सार्वजनिक तौर पर जॉर्ज टेनेट की हिमायत और बचाव करते रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा. टेनेट के इस्तीफ़े के साथ ही बिल क्लिंटन प्रशासन का एक और वरिष्ठ अधिकारी सरकार को अलविदा कह गया और एक तरह से दुनिया की इस सबसे ताक़तवर ख़ुफ़िया एजेंसी के उच्च पद पर अस्थिरता का माहौल बना गया. जॉर्ज टेनेट के कार्यकाल को सीआईए में स्थिरता का दौर माना जाता है. उन्हें क़रीब सात साल पहले सीआईए का निदेशक बनाया गया था. उससे पहले छह साल में पाँच निदेशक यह पद संभाल चुके थे. लंबी क़द काठी वाले और हँसमुख जॉर्ज टेनेट ने सीआईए के निदेशक पद तक पहुँचने के लिए लंबा सफ़र तय किया और वे बहुत असरदार निदेशकों में से एक रहे हैं. जॉर्ज टेनेट शादीशुदा हैं और एक बेटे के बाप हैं. उन्होंने लगभग पूरी ज़िंदगी मैरीलैंड में रहकर ही गुज़ारी है. जॉर्ज टेनेट का जन्म 5 जनवरी 1953 में न्यूयॉर्क में हुआ और उन्होंने अमरीका के दो सबसे प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय में शिक्षा हासिल की. उन्होंने मास्टर्स डिग्री अंतरराष्ट्रीय मामलों में की जिससे उनकी रुचि का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. जॉर्ज टेनेट ने 1985 में ख़ुफ़िया मामलों पर सीनेट की समिति में जगह पाई और 1988 में स्टाफ़ डायरेक्टर बन गए. 1992 में बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति बनने के बाद जॉर्ज टेनेट को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में जगह मिली. उनका पद था राष्ट्रपति के विशेष सहायक और ख़ुफ़िया कार्यक्रमों के वरिष्ठ निदेशक.
1995 में जॉर्ज टेनेट को सीआईए का उपनिदेशक बनाया गया और 18 महीने ही उन्हें सीआईए के कार्यवाहक निदेशक के तौर पर बिठा दिया गया. हालाँकि सीआईए के निदेशक पद के लिए जॉर्ज टेनेट पहली पसंद नहीं थे लेकिन इस पद के लिए राष्ट्रपति के मनोनीत किए हुए एंथोनी लेक ने नाम वापस ले लिया तो जॉर्ज टेनेट को यह पद मिल गया. जॉर्ज टेनेट के नाम को सीनेट ने सर्वसम्मति से मंज़ूरी दी और उन्हें 10 जुलाई 1997 को सीआईए के निदेशक पद की शपथ दिलाई गई. चुनौतियों से दो चार जॉर्ज टेनेट की पहली चुनौती मिली 1998 में जब सीआईए का साबका दक्षिण एशिया में तेज़ी से सामने आए परमाणु संकट से पड़ा जब भारत और पाकिस्तान ने परमाणु परीक्षण किए. इन परीक्षणों से एक बार तो परमाणु युद्ध तक का ख़तरा नज़र आने लगा था. हालाँकि इसकी जानकारी नहीं जुटा पाने पर सीआईए की आलोचना हुई लेकिन जब 11 सितंबर के हमले की पूर्व सूचनाएं इकट्ठी नहीं की जा सकीं तो छोटी लकीर के सामने बड़ी लकीर खींचने जैसा मामला हो गया. सितंबर के हमलों के बारे में ख़ुफ़िया सूचनाओं के बारे में जॉर्ज टेनेट ने इस साल आयोग के सामने क़बूल किया था कि ग़लतियाँ हुई हैं. हालाँकि अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान को सत्ता से बेदखल करने के मामले में जॉर्ज टेनेट की काफ़ी तारीफ़ हुई लेकिन इराक़ के मामले में वह आलोचनाओं से घिर भी गए. इराक़ पर हमले से पहल जॉर्ज टेनेट ने कहा था कि वहाँ महाविनाश के हथियार होने के बारे में बहुत ठोस ख़ुफ़िया सूचनाएं हैं और उन्होंने राष्ट्रपति बुश को भी इसका भरोसा दिलाया था. लेकिन जब महाविनाश के हथियारों के बारे में कोई ठोस सूचनाएं नहीं मिलीं तो जॉर्ज टेनेट ने ख़ुद ही बड़ी ज़िम्मेदारी अपने सर ले ली. इससे उनके राजनीतिक आकाओं को ख़ुद पर बने दबाव को कुछ कम करने का मौक़ा मिला. जॉर्ज टेनेट का इस्तीफ़ा ऐसे समय में आया जब सीआईए पहले से ही इराक़ी नेता अहमद चलाबी को ख़ुफ़िया सूचनाएं लीक होने के मामले में आलोचनाएं के घेरे में थी. |
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