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बुश के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इटली की राजधानी रोम में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और उन्हें अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की. लोगों ने 'बुश वापस जाओ' और 'नो बुश, नो वार' के नारे लगाए और शहर मुख्य चौराहे पर बड़ी सभा आयोजित की. ईसाइयों के धार्मिक नेता पोप जॉन पॉल से बुश की मुलाक़ात के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए हैं, पोप ने बुश से कहा था कि वे इराक़ को उसकी संप्रभुता वापस करने की प्रक्रिया तेज़ करें. अमरीकी राष्ट्रपति की यात्रा को देखते हुए पहले ही इटली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है, इस प्रदर्शन को देखते हुए दंगा निरोधक पुलिस को भी तैनात कर दिया गया है. कई प्रदर्शनकारियों ने आतिशबाज़ियाँ चलाईं और रंग-बिरंगी धुएँ वाले गैस कैन खोले, काफ़ी शोर-शराबा भी हुआ. इस विरोध प्रदर्शन के आयोजकों का दावा है कि लगभग डेढ़ लाख लोग इसमें शामिल हुए जबकि पुलिस उनकी संख्या 25 हज़ार बता रही है.
राष्ट्रपति बुश रोम को नात्सी सैनिकों से मुक्त कराए जाने की 60वीं सालगिरह के मौक़े पर वहाँ पहुँचे हैं, जहाँ उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध में मारे गए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की. इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी इराक़ पर हमले के समर्थक रहे हैं और उन्होंने बुश की नीतियों का समर्थन किया है. इटली के सैनिक इराक़ में मौजूद हैं और बर्लुस्कोनी ने कहा है कि उनके सैनिकों के अमरीकी सैनिकों से पहले स्वदेश लौटने का कोई सवाल नहीं है. इस प्रदर्शन के लिए देश के कोने-कोने से प्रदर्शनकारी रोम पहुँचे थे और वे अपने साथ इंद्रधनुषी झंडे लेकर आए थे जिन पर 'पीस' यानी शांति लिखा था. कुछ नक़ाबपोश प्रदर्शनकारियों ने कचरे के डिब्बों में आग लगा दी और सरकारी इमारतों पर आतिशबाज़ी फेंककर अपना विरोध प्रदर्शित किया. |
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