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रविवार, 30 मई, 2004 को 12:03 GMT तक के समाचार
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शेरॉन की नई योजना पर मतदान स्थगित
इसरायली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन
शेरॉन को नई ग़ज़ा योजना पर भारी विरोध का सामना
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने अपने मंत्रियों के कड़े विरोध का सामना करते हुए ग़ज़ा पट्टी से यहूदी बस्तियों को हटाए जाने के मुद्दे पर मंत्रिमंडल में होने वाला मतदान स्थगित कर दिया है.

समझा जाता है कि रविवार को मंत्रिमंडल की साप्ताहिक बैठक से पहले शेरॉन की संशोधित ग़ज़ा योजना के लिए 23 मंत्रियों में से सिर्फ़ 11 मंत्रियों का ही पक्का समर्थन हासिल हुआ था.

जनमत-सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि ज़्यादातर इसराइली लोग ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से इसरायल की एकतरफ़ा वापसी का समर्थन करते हैं.

लेकिन शेरॉन की लिकुद पार्टी ने इस महीने के शुरू में प्रधानमंत्री की ग़ज़ा योजना के ख़िलाफ़ मतदान किया था.

मंत्रिमंडल के सदस्यों को शुक्रवार को संशोधित ग़ज़ा योजना की प्रति मिली थी और रविवार की बैठक में उन्होंने इस पर बहस शुरू कर दी है.

मंत्रिमंडल की बैठक की शुरुआत करते हुए, शेरॉन ने कहा, "हम इस योजना पर आज बहस शुरू कर देंगे और मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इसे जारी रखेंगे".

समर्थन के लिए अपील

समझा जाता है कि लिकुद पार्टी में शेरॉन के मुख्य राजनीतिक विरोधी, बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बात में प्रमुख भूमिका निभाई है कि उनकी संशोधित ग़ज़ा योजना के लिए मंत्रिमंडल का समर्थन न मिल पाए.

येरुशलम से बीबीसी के संवाददाता, जेम्स रेनॉल्ड्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मंत्रियों का दिल जीतने के मक़सद से शेरॉन ने अपनी मूल ग़ज़ा योजना में फ़ेरबदल की है और इसे 'चरणबद्ध वापसी योजना' का नया नाम दिया है.

मूल ग़ज़ा योजना से यह संशोधित गज़ा योजना इस दृष्टि से भिन्न है कि इसमें यहूदी बस्तियों को एक ही बार पूरी तरह से हटाए जाने की बजाय चार चरणों में हटाए जाने की बात कही गई है.

जेम्स रेनॉल्ड्स का कहना है कि शेरॉन की इस रियायत से शायद कुछ मंत्री क़ायल हो सकेंगे, लेकिन सभी मंत्री इस रियायत से आश्वस्त नहीं होंगे.

शेरॉन के सत्तारूढ गठबंधन में शामिल दो दक्षिणपंथी पार्टियों ने तो यह धमकी भी दे डाली है कि अगर ग़ज़ा और पश्चिमी तट से एक भी यहूदी बस्ती को हटाया गया, तो वे सरकार से अपना समर्थन वापस ले लेंगी, जिससे शेरॉन सरकार संसद में अपना बहुमत खो बैठेगी.

आलोचक

अरियल शेरॉन अपने मंत्रियों से कह रहे हैं कि वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के मक़सद से 'ब्लैकमेल' करना बंद कर दें.

शेरॉन की इस सख़्त भाषा को इसराइली जनता का समर्थन हासिल करने के लिए उनकी अपील के तौर पर देखा जा रहा है.

शेरॉन की ग़ज़ा योजना को अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का समर्थन हासिल है.

लेकिन इसके इसराइली आलोचकों का कहना है कि ग़ज़ा को बग़ैर किसी शर्त के छोड़ कर आने से फ़लस्तीनी आत्मघाती बम हमलावरों के हौसले बुलंद होंगे.

ख़ुद फ़लस्तीनियों ने भी शेरॉन की ग़ज़ा योजना की आलोचना की है क्योंकि इसके तहत फ़लस्तीनी शरणार्थियों को इसराइल में अपने घरों को वापस लौटने का अधिकार नहीं दिया गया है.

इस योजना के अरब आलोचकों का यह भी कहना है कि इसके तहत इसराइल पश्चिमी तट में यहूदी बस्तियों के विशाल इलाक़े रख सकेगा.

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