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कैबिनेट के सामने होंगे शेरॉन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसरायल की कैबिनेट की रविवार को बैठक हो रही है जिसमें प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की ग़ज़ा योजना पर विचार होगा. इसराइली सैनिकों और यहूदी बस्तियों को ग़ज़ा से हटाने की शेरॉन की योजना को सत्ताधारी लिकुड पार्टी के सदस्यों ने ठीक एक सप्ताह पहले मतदान कर नामंज़ूर कर दिया था. इससे अरियल शेरॉन की ग़ज़ा और पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों से यहूदी बस्तियों को हटाने की योजना को गहरा धक्का लगा है. माना जा रहा है कि लिकुड पार्टी के कुछ सदस्य प्रधानमंत्री को ये सलाह देने वाले हैं कि या तो वे अपनी योजना बदल लें या फिर उसको अमल में लाने का ख़्याल छोड़ दें. सूत्रों के अनुसार पार्टी के सदस्य इस बात पर ज़ोर देंगे कि शेरॉन कुछ भी करने से पहले उनसे सलाह-मशविरा ज़रूर करें. हालाँकि रविवार की बैठक में मंत्रियों को अरियल शेरॉन की योजना को मंज़ूरी देने के लिए मिलना था. इस योजना को अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की स्वीकृति थी, लेकिन पार्टी में इसके ख़िलाफ़ वोट पड़ने से शेरॉन कमज़ोर पड़ गए हैं. रोडमैप पर ज़ोर शायद इसी कमज़ोरी को भांपते हुए फ़्लस्तीनी नेतृत्व ने अंतरराष्ट्रीय शांति प्रस्ताव 'रोडमैप' वापस लागू करने पर ज़ोर दिया है.
फ़लस्तीनियों ने अरियल शेरॉन की योजना को ये कहते हुए नामंज़ूर कर दिया कि वह उन पर थोपी जा रही है. इस महीने के अन्त में फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद कुरई अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस से मिलने वाले हैं. क़यास लगाए जा रहे हैं कि इस बातचीत के दौरान कुरई अमरीका से रोडमैप लागू कराने की कोशिश करेंगे. इसमें अगले साल के अंत तक फ़लस्तीनी राज्य स्थापित करने की पेशकश है. हालाँकि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने मिस्त्र के एक अख़बार से कहा है कि जब रोडमैप लाया गया था, तब 2005 तक फ़लस्तीनी राज्य की स्थापना की बात कही गई थी. लेकिन मौजूदा हालात में 2005 तक इसे अमल में लाना मुश्किल हो सकता है. |
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