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ग़द्दाफ़ी की निशस्त्रीकरण के लिए अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लीबिया के नेता कर्नल मोअम्मर ग़द्दाफ़ी ने कहा है कि वे शांति और निशस्त्रीकरण की पहल का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं. ग़द्दाफ़ी पंद्रह साल में पहली बार अपनी यूरोप की यात्रा के तहत मंगलवार को ब्रसेल्स पहुँचे. ग़द्दाफ़ी ने कहा कि सामूहिक विनाश के हथियारों का ख़ात्मा करने की घोषणा करने से लीबिया को ज़्यादा लाभ मिला है. उन्होंने अमरीका से लेकर चीन और दुनिया के बाक़ी देशों से अपील की कि वे शांति और निशस्त्रीकरण के लीबिया के रास्ते पर चले. ग़द्दाफ़ी ने यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष रोमानो प्रोदी सहित यूरोपीय संघ के कई नेताओं से बातचीत की. यूरोपीय संघ ने हाल में लीबिया द्वारा उठाए गए क़दमों की सराहना की. संकेत यह यात्रा वर्षों अलगथलग रहने के बाद लीबिया को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में दोबारा शामिल करने के प्रतीक के तौर पर देखी जा रही है. इससे पहले ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर त्रिपोली जा चुके हैं और व्हाइट हाउस ने भी यह घोषणा कर दी है कि वह ग़द्दाफ़ी के शासन के ख़िलाफ़ लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील दे रहा है. इन सब बातों को देखते हुए अब यह कहा जा सकता है कि कर्नल ग़द्दाफ़ी को अब एक सहयोगी के तौर पर देखा जाने लगा है.
संबंधों में यह गर्माहट लीबिया के इस फ़ैसले के बाद आई कि वह सामूहिक विनाश के हथियारों का परित्याग कर रहा है. इस क़दम को अमरीका और ब्रिटेन इराक़ युद्ध का नतीजा मान रहे हैं. अपनी यात्रा के दौरान ग़द्दाफ़ी बार्सेलोना प्रक्रिया की सदस्यता की मांग करेंगे. हालाँकि अभी भी असहमति के कई मामले सुलझे नहीं है. जर्मनी अब भी लीबिया से बर्लिन में 18 साल पहले हुए बम हमले के लिए मुआवज़ा मांग रहा है. लेकिन यह तय है कि यूरोप की यह यात्रा कर्नल ग़द्दाफ़ी के 'पुनर्वास' की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है. |
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