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फलूजा में संघर्षविराम पर भ्रम की स्थिति | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक के फलूजा शहर में घोषित संघर्षविराम पर भ्रम की स्थिति बन गई है. एक अमरीकी कमांडर का कहना है कि बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल पाने की वजह से लड़ाई दोबारा शुरू हो गई है. लेकिन एक अमरीकी जनरल ने दावा किया है कि संघर्षविराम अब भी जारी है. इससे पहले इराक में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने घोषणा की थी कि फलूजा में अमरीकी सेना ने सैन्य कार्रवाई रोककर संघर्षविराम कर दिया है. उनके अनुसार संघर्षविराम का उद्देश्य स्थानीय विद्रोहियों के साथ बातचीत की संभावना तलाश करना और इलाक़े में सहायता सामग्री पहुँचाना था. इस सुन्नी बहुल इलाक़े के नियंत्रण के लिए पिछले पाँच दिनों से गठबंधन सेना का विद्रोहियों के साथ संघर्ष चल रहा था. इसमें अब तक 300 इराकी मारे जा चुके हैं. करबला दक्षिण के करबला में अब भी घमासान जारी है, जहाँ अमरीकी सेना शिया विद्रोहियों से लड़ रही है. सेना के अनुसार वो कुत शहर पर फिर से कब्ज़ा करने में कामयाब रही है.
अमरीका का कहना है कि पिछले दो दिनों में छह और सैनिक मारे गए हैं, जबकि करबला और फलूजा में 14 इराकियों की मौत हो चुकी है. उधर इराक़ में बंधक बनाए गए छह विदेशी नागरिकों की सुरक्षा के लिए चिंता बढ़ती जा रही है. बंदी बनाए गए लोगों में तीन जापानी नागरिक, दो फ़लस्तीनी नागरिक और एक सीरिया में जन्मा कनाडा का नागरिक है. हालाँकि जापान ने फैसला किया है कि वह बंधक बनाए गए तीन जापानी नागरिकों को मार डालने की धमकी के बावजूद इराक़ से अपनी सेना वापस नहीं बुलाएगा. विरोधाभासी बयान सैन्य कारर्वाई रोकने की घोषणा करते हुए बगदाद में पॉल ब्रेमर ने कहा था कि दोपहर में गठबंधन सेनाओं ने हमला रोकने का एकतरफ़ा फैसला लिया, जिससे शासकीय परिषद, स्थानीय मुसलमान नेताओं और गठबंधन सेना के विरोधी आपस में विचार-विमर्श कर सकें.
लेकिन डेढ़ घंटे बाद ही लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रेनन बायर्न ने कहा कि उनके सैनिकों को लड़ाई दोबारा शुरू करने के आदेश दे दिए गए हैं. लेकिन इस ऑपरेशन का संचालन कर रहे ब्रिगेडियर जनरल मार्क किम्मिट ने रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि संघर्षविराम अब भी जारी है. संघर्षविराम की घोषणा से पहले तक फलूजा में दो अमरीकी मरीन्स और 10 इराकी विद्रोही मारे जा चुके थे. जैसे-जैसे अमरीकी सेना शहर में आगे बढ़ रही थी, वैसे ही उन पर बमों और रॉकेट के ज़रिए ग्रेनेडॉं से हमले हो रहे थे. स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि आसमान में एफ-16 विमानों को उड़ता हुआ देखा जा सकता था और ज़मीन पर चारों तरफ धुआं उठता नज़र आ रहा था. लड़ाई तेज़ होने पर लोग शहर छोड़कर भागने लगे हैं. सूत्रों के मुताब़िक शहर की गलियों में लाशें पड़ी थीं. जगह-जगह लोगों के इलाज के लिए कामचलाऊ अस्पताल खोले जा रहे हैं लेकिन मेडिकल सुविधाओं के अभाव की वजह से उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है. हालाँकि इराक में अमरीकी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल रिकार्डो सांचेज़ ने इस बात से इनकार किया है कि उनकी सेना मानवीय सहायता रोक रही है. |
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