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हेती में अंतरराष्ट्रीय बलों को मंज़ूरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हेती में अंतरराष्ट्रीय बलों की तैनाती को मंज़ूरी दे दी है. सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थाई सदस्यों समेत सभी 15 सदस्यों ने हेती में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की अविलंब तैनाती के पक्ष में वोट दिया. शुरू में यह तैनाती तीन महीनों के लिए होगी. इस बीच अमरीकी सैनिकों का पहला दल हेती पहुँच गया है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने अमरीकी मरीन सैनिकों को हेती में तैनात करने के आदेश दिए थे. उन्होंने कहा कि अमरीकी मरीन हेती में तैनात किए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय बल का प्रमुख हिस्सा होंगे. बुश ने कहा कि अमरीकी सैनिक हेती में स्थायित्व लाने में सहायक हो सकेंगे. उधर फ़्रांस ने भी अपने सैनिकों की एक टुकड़ी हेती भेजने का फ़ैसला किया है. इससे पहले हेती की राजधानी पोर्ट-ओ-प्रिंस के हवाई अड्डे पर कनाडा के सैनिकों के नियंत्रण की ख़बर आई थी, जिसका कनाडा ने खंडन किया है. राजधानी में सशस्त्र गिरोहों द्वारा लूटपाट के बाद कर्फ़्यू लगा दिया गया है. हेती में विद्रोहियों के एक नेता गाय फिलिपे ने देश में अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की तैनाती का स्वागत किया है. पलायन इस बीच हेती के राष्ट्रपति जाँ बर्टरंड एरिस्टीड देश छोड़कर चले गए हैं.
उन्होंने एक बयान में कहा, "देश का संविधान हेती के लोगों के ख़ून से नहीं लिखा जाना चाहिए. अगर मेरे त्यागपत्र से हिंसा रुक जाती है तो मुझे देश छोड़ना स्वीकार है." हेती के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बोनीफ़ेस अलेक्ज़ांद्रे ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद सँभाला है. एरिस्टीड के ख़िलाफ़ पिछले कई सप्ताह से हथियारबंद विद्रोह चल रहा है. विद्रोही गुटों ने देश के कई हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर रखा है. |
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