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विद्रोहियो का महत्वपूर्ण शहर पर क़ब्ज़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हेती में राष्ट्रपति ज्याँ बर्टरैंड एरिस्टाइड को हटाने के लिए लड़ रहे विद्रोहियों ने देश के दूसरे बड़े शहर केप हेतियन पर क़ब्ज़ा कर लिया है. शहर के चार पुलिस थानों को जला दिया गया है. हज़ारों लोग सड़कों पर निकल आये हैं और शहर के प्रमुख बन्दरगाह को लूटा गया है. हेती कैरेबियाई देश है. यूं तो स्वतंत्र होने वाला यह पहला कैरेबियाई देश है लेकिन दशकों से चली आ रही ग़रीबी, उत्पीड़न, हिंसा और तानाशाही ने इस देश की स्थिति बिगाड़ दी है. 83 आबादी वाला इस देश में विद्रोही, देश के राष्ट्रपति ज्याँ बर्टरैंड एरिस्टाइड का तख्ता पलट करना चाह रहे हैं. केप हेतियन के बाद उनका अगला निशाना है राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस. मुक़ाबला नहीं पाँच लाख की आबादी वाले केप हेतियन शहर पर विद्रोहियों का क़ब्ज़ा आसानी से हो गया लगता है और उन्हें कोई कड़ा मुक़ाबला नहीं करना पडा.
जैसे ही लगभग 200 सशस्त्र विद्रोही शहर में घुसे, पुलिस वाले वहां से भाग गये. टाइम्स अख़बार के पत्रकार डेविड ऐडम्स ने वहां से भेजी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोलीबारी पहले हवाई अड्डे पर शुरू हुई और फिर विद्रोही शहर की और बढ़े. पलिस थाने पर हमले के बाद वहां से लगभग ढाई सौ क़ैदियों को छोड़ दिया गया. रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि राष्ट्रपति के कुछ कट्टर समर्थक एक विमान से भाग जाने में सफल हुए हैं. अब हेती की समस्या के राजनैतिक समाधान के लिये समय नहीं रह गया लगता. विपक्ष के पास सिर्फ़ एक दिन का समय है जिसमें उसे ये फ़ैसला करना है कि वो उस अंतरराष्ट्रीय शांति योजना को स्वीकार करे या नहीं जिसमें एक गंठबंधन वाली सरकार का सुझाव है. राष्ट्रपति एरिस्टाइड ने तो इसे स्वीकार कर लिया है लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार करने से कतरा रहा है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति एरिस्टाइड ने एक लम्बे अरसे तक हिंसा और भ्रष्टाचार का सहारा लेकर शासन किया है इसलिये उन्हें राष्ट्रपति बनाये रखने वाले किसी भी समझौते से हेती की समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता. |
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