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हैती के राष्ट्रपति को अमरीका की सलाह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने हैती के राष्ट्रपति जीं बर्तांद अरिस्तीद से कहा है कि वह अपने पद पर बने रहने पर फिर से विचार करें. अमरीका के विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने हैती में कई दिनों से जारी हिंसा को देखते हुए यह अनुरोध किया है. वाशिंगटन में बीबीसी संवाददाता जॉन लाइन का कहना है कि ऐसा लगता है कि अमरीका ने यह मन बना लिया है कि जीं बर्तांद अरिस्तीद को अब अपने पद से हट जाना चाहिए. ग़ौरतलब है कि अमरीका हैती का एक प्रमुख सहयोगी देश रहा है. इस बीच हैती की स्थिति पर विचार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गुरूवार को एक आपात बैठक हुई जिसमें वहाँ एक अंतरराष्ट्रीय सेना भेजने पर विचार करने की बात कही गई लेकिन फिलहाल किसी कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है. राष्ट्रपति अरिस्तीद के ख़िलाफ़ विद्रोहियों ने हैती का क़रीब आधे हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया है और राजधानी पर भी हमला करने की धमकी दे रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति ने अपने पद नहीं छोड़ने का इरादा ज़ाहिर किया है. फ्रांस पहले ही अरिस्तीद से गुज़ारिश कर चुका है कि वे स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपने पद से हट जाएं.
अमरीका अभी तक तो अरिस्तीद के समर्थन में खड़ा हुआ था लेकिन अब उसने भी उनका साथ छोड़ने का इशारा दे दिया है. पॉवेल ने कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि अरिस्तीद स्थिति का ख़ुद जायज़ा लेंगे और हैती को लोगों की भलाई जिसमें होगी वही क़दम उठाएंगे." पॉवेल ने यह भी कहा कि अरिस्तीद के कार्यकाल में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अकुशलता जैसी समस्ताएं तो रही हैं. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अमरीका के ये शब्द इस संकेत के काफ़ी नज़दीक माने जाते हैं कि अरिस्तीद को पद से हटने के लिए कहा जा रहा है. बग़ावत सशस्त्र विद्रोही राष्ट्रपति अरिस्तीद को पद से हटाना चाहते हैं और उन्होंने देश के क़रीब आधे हिस्से पर क़ब्ज़ा करने के बाद राजधानी पोर्ट ओ प्रिंस पर भी हमला करने की धमकी दी है. विद्रोही न तो किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं और न ही किसी अंतरराष्ट्रीय बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं.
विद्रोहियों के एक नेता गुई फ़िलिप ने राजधानी पर हमले की धमकी दोहराते हुए कहा है कि यह बहुत जल्द हो जाएगा. "मैं राष्ट्रपति अरिस्तीद को सलाह दूंगा कि वे राष्ट्रीय महल तुरंत छोड़ दें, अन्यथा हम बहुत जल्दी ही महल पर हमला करेंगे और उन्हें पकड़ भी लेंगे." पोर्ट ओ प्रिंस में मौजूद बीबीसी संवाददाता का कहना है कि राजधानी पर हमले की विद्रोहियों की धमकी को गंभीरता से लिया जा रहा है और राष्ट्रपति के वफ़ादार सैनिकों ने आसपास सुरक्षा प्रबंध मज़बूत किए हैं. राष्ट्रपति भवन के आसपास पहरा कड़ा कर दिया गया है और शहर में क़ानून और व्यवस्था बिल्कुल बिखर सी गई है. शहर में लूटपाट और हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं और बहुत से विदेशी हैती छोड़कर भाग रहे हैं जिनमें संयुक्त राष्ट्र के बहुत से कर्मचारी भी शामिल हैं. फ़रवरी के प्रथम सप्ताह में शुरू हुई इस बग़ावत में 70 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं. |
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