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राष्ट्रमंडल सम्मेलन पर ज़िम्बाब्वे की छाया
नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में राष्ट्रमंडल शिखर सम्मेलन समाप्त हो गया और इस पर पूरे समय ज़िम्बाब्वे मामले की छाया मंडराती रही. ज़िम्बाब्वे ने सम्मेलन से बाहर होने की घोषणा कर दी और इस फ़ैसले पर अलग-अलग नेताओं की अलग-अलग राय थी. जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने कहा कि वह जिम्बाब्वे का निलंबन अनिश्चितकाल तक जारी रखने के फ़ैसले को मानने को क़तई तैयार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि यह क़दम अस्वीकार्य है और उसके तुरंत बाद वह सम्मेलन से बाहर हो गए.
दक्षिण अफ़्रीका, मोज़ाम्बीक, नामीबिया और ज़ाम्बिया इस मामले से काफ़ी क्षुब्ध रहे. मोज़ाम्बीक के राष्ट्रपति का कहना था, "संगठन ने यह फ़ैसला सर्वसम्मति से नहीं किया". लेकिन कुछ अन्य देशों ने इस स्थिति तक पहुँचने का दोष ज़िम्बाब्वे में हुए सम्मेलन को दिया. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री हेलेन क्लार्क ने कहा, "यह राष्ट्रमंडल के लिए संकट की घड़ी नहीं है बल्कि ज़िम्बाब्वे के लिए है". ज़िम्बाब्वे की सत्तारूढ़ पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी डिडिमस मुतासा ने कहा कि उन्हें ख़ुशी है कि ज़िम्बाब्वे राष्ट्रमंडल से बाहर हो गया. उनका कहना था, "यह जहन्नुम से निजात मिलने के बराबर है क्योंकि ब्रिटेन और उसके श्वेत सहयोगियों ने राष्ट्रमंडल को ज़िम्बाब्वे को बुरा-भला कहने का क्लब बना कर रख दिया था". |
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