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ज़िम्बाब्वे राष्ट्रमंडल से अभी निलंबित ही रहेगा
ज़िम्बाब्वे को अभी राष्ट्रमंडल से निलंबित रखा जाएगा. संगठन के महासचिव डॉन मैक्किनॉन ने कहा है कि ज़िम्बाब्वे के मामले पर उचित समय पर विचार किया जाएगा. ज़िम्बाब्वे में लोकतांत्रिक सुधारों पर नज़र रखने की ज़िम्मेदारी नाइजीरिया के राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासांजो को दी गई है. ओबासांजो उचित समय पर छह देशों की समिति को सूचित करेंगे कि वहाँ सुधारों की क्या स्थिति है. नाइजीरिया की राजधानी अबुजा में राष्ट्रमंडल की बैठक में रविवार को घंटों चली बहस के बाद यह फ़ैसला किया गया. बहस में आम तौर पर विकासशील देशों की राय ज़िम्बाब्वे की सदस्यता बहाल किए जाने के पक्ष में थी, तो पश्चिमी देश इसके ख़िलाफ़. इससे पहले कल छह देशों की समिति को ज़िम्बाब्वे के मामले पर ग़ौर करने को कहा गया था. इस समिति का एक सदस्य भारत भी है. अन्य सदस्य हैं- ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ़्रीका, जमैका, मोज़ांबिक और कनाडा. मतभेद ज़िम्बाब्वे को लेकर आस्ट्रेलिया और कनाडा का रुख़ स्पष्ट है. इन देशों का कहना है कि जब तक वहाँ लोकतंत्र और मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार नज़र नहीं आता तब तक निलंबन वापस नहीं लिया जाना चाहिए. दक्षिण अफ़्रीका और मोज़ांबिक का कहना है कि इससे ज़िम्बाब्वे के राजनीतिक सुधार कार्यक्रम में बाधा पड़ रही है. ज़िम्बाब्वे के मामले पर भारत ने अपना मत अभी तक स्पष्ट नहीं किया है. ज़िम्बाब्वे के राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने कहा था कि संगठन ने उनके देश के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं किया तो वह राष्ट्रमंडल से बाहर निकल जाएगा. ज़िम्बाब्वे को पिछले साल के चुनावों में कथित अनियमितताओं के बाद संगठन की सदस्यता से निलंबित कर दिया गया था. |
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