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भारत एक अहम सदस्य के रूप में उभरा
यहाँ नाइजीरिया में एक कहावत है जिसका मतलब ये है कि जब घर के बर्तन खनकते हैं तो मामला चुपचाप से घर के बुज़ुर्ग को सौंप दिया जाता है. ये बात कल सुबह मेरे ड्राइवर अब्दुल रहमान ने मुझे बताई. और फिर कुछ ही घंटों बाद जब ये फ़ैसला हुआ कि ज़िम्बाब्वे के निलंबन के मामले पर भारत समेत छह देश दोबारा ग़ौर करेंगे तो एक बार फिर यही साबित हुआ कि राष्ट्रमंडल देशों में भारत की गिनती प्रमुख सदस्यों मे की जाती है. इस समिति में भारत के अलावा अन्य सदस्य हैं आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, जमैका, मोज़ांबिक और कनाडा. हालाँकि ज़िम्बाब्वे को लेकर आस्ट्रेलिया और कनाडा का रुख़ स्पष्ट है और कनाडा के प्रधानमंत्री ज्याँ ख़ेतियन ने पहले ही साफ कर दिया है की जल्दी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.
ख़ेतियन ने कहा, "कोई अंतिम फैसला नही होगा, लेकिन हाँ स्थिति का जायज़ा लिया जाएगा और देखना ये होगा कि क्या कुछ बदला है और अगले दो वर्षों में क्या कुछ बदलने की संभावना है." इस समिति की अध्यक्षता जमैका के प्रधानमंत्री करेंगे. अब ज़िम्बाब्वे पर भारत का क्या मत है इस पर तो भारत शायद आज खुल कर सामने आ जाएगा लेकिन जहाँ तक बात रही पाकिस्तान की तो इस बारे में भारत के विदेश मंत्री का बस यही कहना था कि इसे भारत द्विपक्षीय मामलों के नज़रिए से नहीं देखेगा. राष्ट्रमंडल देशों की इस बैठक में जिस दूसरे सबसे बड़े मामले का फैसला हुआ वो था महासचिव का चुनाव. यहाँ चर्चा गर्म थी कि शायद न्यूज़ीलैंड के डॉनल्ड मैक्किनॉन की छुट्टी हो जाएगी लेकिन उन्होंने श्रीलंका के पूर्व विदेश मंत्री लक्ष्मण कादीरगमार को 40 के मुक़ाबले 11 मतों से पराजित किया. |
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