|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शेरॉन फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री से मिलेंगे
इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन ने कहा है कि फ़लस्तीन के 'मनोनीत प्रधानमंत्री' अहमद क़ुरई 'जितनी जल्दी से जल्दी तैयार हों' वह उनसे मिलने के लिए तैयार हैं. शेरॉन के इस निमंत्रण से इसराइल ने अपना पुराना रुख़ बदल दिया है कि वह क़ुरई से बात करना नहीं चाहता क्योंकि वह फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात के नज़दीक़ी हैं. इसराइल और अमरीका अराफ़ात को 'आतंकवादियों को मदद देने वाला' मानते हैं और उनसे किसी तरह की बातचीत को राज़ी नहीं हैं. शेरॉन ने कहा कि फ़लस्तीनियों ने ही ऐसी बैठक टालने की अपील की थी जिससे 'अबू आला' नाम से भी जाने जाते प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई कुछ 'शक्ति' जुटा सकें. शेरॉन ने कहा, "हम फ़लस्तीनियों से बातचीत क़ायम रखे हैं भले ही वह प्रधानमंत्री के स्तर पर नहीं हो." उन्होंने कहा, 'हम बातचीत किसी भी समय शुरू करने के लिए तैयार हैं.' आलोचना और नई शुरुआत लेकिन इसराइली अख़बार 'हारेत्ज़' ने फ़लस्तीन के एक कैबिनेट मंत्री जमाल अल-शोबाकी के हवाले से शेरॉन और क़ुरई के बीच किसी भी तरह की बैठक के बारे में पहले रखे गए प्रस्ताव से इनकार किया.
अल-शोबाकी ने तो शेरॉन पर आरोप भी लगाया कि फ़लस्तीनियों के विरुद्ध इसराइल की ओर से अपनाए जा रहे कड़े रवैये को लेकर हो रही अंतरराष्ट्रीय आलोचना से वह ध्यान बँटाने की कोशिश कर रहे हैं. इधर शुक्रवार को ही इसराइल ने यात्रा से जुड़े कुछ प्रतिबंध हटा लिए जिससे फ़लस्तीनी सांसद पश्चिमी तट के शहर रामल्लाह में हो रही एक संसदीय बैठक में शामिल हो सकें. इस सत्र में फ़लस्तीनी सांसद नई सरकार को लेकर क़ुरई की ओर से रखे जा रहे विश्वास प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा लेंगे. अगर क़ुरई मतदान में विजयी रहते हैं तो वह आपातकालीन कैबिनेट की जगह पूरा मंत्रिमंडल बना सकेंगे. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||