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गुरुवार, 30 अक्तूबर, 2003 को 13:26 GMT तक के समाचार
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इराक़ संकट से उबरने के अमरीकी प्रयास
कल क्या होगा किसको पता?
अंतरर्राष्ट्रीय सहायता जारी है

अमरीकी सैनिकों ने अब इराक़ में सद्दाम हुसैन के शहर तिकरित में लोगों की धरपकड़ शुरू की है.

हाल के दिनों में वहाँ गठबंधन सेना के बहुत से सैनिकों पर कई हमले किए गए.

गठबंधन सेना के कर्नल स्टीव रसेल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया," हमलोग उन्हीं को निशाना बना रहे हैं जिनपर आतंकवादी होने का संदेह है."

हमलोग कभी भी हथियारबंद सुरक्षा की माँग नहीं करेंगे क्योंकि इसका मतलब ये होगा कि हम तटस्थ नहीं हैं. और ये बात सिर्फ़ इराक़ में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हर उस जगह लागू होती है जहाँ कहीं भी हम राहत कार्य में लगे हैं

नादा दौमानी,रेड क्रॉस सोसायटी

वॉशिंगटन में मौजूद अमरीका के एक रक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि गठबंधन फ़ौजों पर हुए हालिया हमलों में सद्दाम हुसैन के पूर्व अधिकारी का हाथ है.

उस अधिकारी का नाम इज़्ज़त इब्राहिम अल- दौरी है.

इराक़ में सैनिकों पर जारी हमले

अमरीकी फ़ौजियों पर इराक़ में हो रहे हमलों और इराक़ में मौजूद राहत दलों के बीच समन्वय के मामले में कई तरह की बहसबाज़ी जारी है.

लेकिन इराक़ में सैनिकों पर जारी हमलों को देखते हुए अमरीका अब प्रतिबंधित हथियारों की खोज की बजाय वर्तमान संकट से निबटने पर अधिक ध्यान दे रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति की युद्द-विराम की घोषणा के बाद से पिछले बुधवार तक वहाँ मरने वाले सैनिकों की संख्या 115 हो गई है.

ग़ौरतलब है कि गठबंधन फ़ौज के इतने सैनिक तो युद्ध के दौरान भी नहीं मारे गए थे.

अंतरर्राष्ट्रीय सहायता संगठन

रेड क्रॉस सोसायटी और संयुक्त राष्ट्र ने घोषणा की है कि वे संगठनों पर होने वाले हमलों को देखते हुए वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में कटौती करेंगे.

बग़दाद में स्थित रेड क्रॉस के मुख्यालय में पिछले सोमवार को बमबारी भी हुई थी.

इन हमलों में 36 लोगों की जाने चली गईं है.

रेड क्रॉस सोसायटी की प्रवक्ता नादा दौमानी ने बीबीसी को बताया कि रेड क्रॉस इस बात को लेकर असमंजस में है कि इराक़ में किस तरह से अपने कर्मचारियों को सुरक्षित रखते हुए ज़रुरतमंदों को राहत पहुँचायी जाए.

उन्होंने ये भी कहा," हमलोग कभी भी हथियारबंद सुरक्षा की माँग नहीं करेंगे क्योंकि इसका मतलब ये होगा कि हम तटस्थ नहीं हैं. और ये बात सिर्फ़ इराक़ में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में हर उस जगह लागू होती है जहाँ कहीं भी हम राहत कार्य में लगे हैं."

इराक़ में रेड क्रॉस सोसायटी के क़रीब 30 विदेशी और 600 इराक़ी कर्मचारी राहत कार्यों में लगे हैं.

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