विभिन्न देशों में क्या है कॉमिक्स की शैली

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कॉमिक्स के दुनिया में कई प्रशंसक हैं. कई उसके किरदारों से प्यार करते हैं तो कई उसकी कलाकारी से प्रभावित होते हैं. कई लोगों के लिए यह तस्वीरों के माध्यम से कहानी बताने की एक कला है.
कॉमिकों की सहजता और रूह पूरी दुनिया में एक जैसी है. इसके पन्नों में विविधता देखने को मिलती है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि वो किस देश में बनी है.
'द असेंशियल गाईड टू वर्ल्ड कॉमिक्स' के लेखक और कॉमिक बुक अलायंस के चेयरमैन टिम पिलचर कहते हैं, ''इनमें कई तरह की शैली और विषय होते हैं. इनकी वजह से कॉमिकों में विभिन्नता आती है.''
भारत में कॉमिक का इतिहास काफी पुराना है. अमर चित्र कथा भारत के गौरव ग्रंथों पर आधारित है. विशाल गाथाएं कॉमिक के रूप में प्रकाशित की गई हैं.
चाचा चौधरी और साबू
कार्टूनिस्ट प्राण कुमार के चाचा चौधरी भी भारतीयों में काफी प्रचलित हैं. एक होशियार बजुर्ग, चाचा अपनी सूझबूझ से अपने दुश्मनों पर काबू पाते हैं. उनकी कहानियों में क्रिकेट मैच और रोटी खाने जैसे चीजें शामिल होती हैं.
कुमार कहते हैं, ''मैं कुछ ऐसा बनाना चाहता था जो भारतीय हो, जिसमें ऐसे विषय शामिल हों, जो भारत से संबंधित हो.''
वे कहते हैं, ''मैंने 1960 के दशक में कॉमिक बनानी शुरु की लेकिन सभी पश्चिमी कॉमिक पढ़ते थे. मैंने सोचा क्यों न कुछ अपना बनाया जाए जो स्थानीय विषयों पर आधारित हो.''
जापान में कॉमिक या मांगा को बच्चे भी पढ़ते हैं और बड़े भी. विषयों की बात करें तो जीवट गाथा से लेकर रोमांस तक होता है.
यह उद्योग तेज और प्रयोज्य है. कलाकार सप्ताह में 20 से 30 पन्ने बना सकते हैं जिससे फोनबुक जितनी छोटी पुस्तिकें बन सकती हैं और फिर फेंक दी जाती हैं.












