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क्लिटोरिस का साइज़ बढ़ने पर सर्जरी करवाने वाली एक महिला की कहानी
- Author, ब्रूना एल्विस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़ ब्राज़ील, साओ पाओलो से
क्लिटोरिस का आकार बड़ा होना कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक विकार है जिसे क्लिटोरोमेगैली कहते हैं.
इसके कई कारण हो सकते हैं, आनुवांशिक से लेकर हार्मोन के असंतुलन तक इसके कई कारण हो सकते हैं. स्टेरॉयड का इस्तेमाल भी इसकी वजह हो सकती है.
हाल ही में ब्राज़ील के आसिस शटोब्रियां मैटर्निटी स्कूल ने क्लिटोरिस के विकार को ठीक करने के लिए की जाने वाली सर्जरी क्लिटोरोप्लास्टी की.
सर्जरी करवाने वाली मारिया 22 साल की हैं और उन्होंने बीबीसी को इस सर्जरी की प्रक्रिया के बारे में बताया.
मारिया ने अपने क्लिटोरिस के आकार के बारे में डॉक्टरों की टीम से सलाह मशविरा किया था. दिसंबर 2021 से ही उनका हार्मोन असंतुलित होने का इलाज चल रहा था.
मारिया ने कहा कि सेक्स के दौरान उनके जननांग का ऊपरी हिस्सा (क्लिटोरिस) आकार में बड़ा हो गया था जिसकी वजह से वो बहुत असहज महसूस कर रही थीं.
वो बताती हैं, "अठारह साल की उम्र से जब मैं सेक्शुअली एक्टिव हुई, मैंने ग़ौर किया कि मेरी क्लिटोरिस काफ़ी फूल गई थी. मैं इससे परेशान थी."
समाधान की तलाश
मारिया ने क्लिटोरिस के आकार को छोटा करने के उपायों के बारे में गायनीकोलॉजिस्ट से बात की.
डॉक्टरी जाँच में पता चला कि मारिया को आनुवांशिक (जेनेटिक) विकार है, जिसकी वजह से क्लिटोरिस का अनियमित विकास हो गया.
मारिया ने बताया, "रोज़ाना की ज़िंदगी में इससे मुझे कोई दिक़्क़त नहीं होती थी, लेकिन सेक्स के दौरान मेरी नज़र जब इस पर पड़ती थी तो मुझे लगता था कि ये कोई सामान्य बात नहीं है. इसीलिए मैं इसे छोटा कराना चाहती थी."
हालांकि उनके पार्टनर ने इसे लेकर कभी उनसे अपनी असहजता ज़ाहिर नहीं की लेकिन उसने इसके इलाज का सुझाव दिया क्योंकि यह स्थिति मारिया को असहज बनाती थी.
मारिया ब्राज़ील के जिस सिएरा प्रांत में रहती हैं, वहाँ इसका कोई डॉक्टर नहीं था, इसलिए उन्हें तब तक इंतज़ार करना पड़ा जबतक साओ पाओलो से एक पेशेवर डॉक्टर सर्जरी करने 3,000 किलोमीटर दूर आने को तैयार नहीं हो गए.
वो बताती हैं, "सर्जरी सफल रही. अब मैं ख़ुद को संपूर्ण औरत महसूस करती हूँ, क्योंकि पहले ये मेरे लिए कोई नॉर्मल बात नहीं थी. अधिकांश लोगों के लिए ये बहुत छोटी समस्या है, लेकिन जो भुक्तभोगी हैं, उनके लिए यह बहुत मुश्किल भरा होता है."
'ये कोई बीमारी नहीं है'
सर्जरी करने वाले गायनीकोलॉजिस्ट मारसेलो प्रैसेजेस कहते हैं कि क्लिटोरिस के आकार का बड़ा होना, एक 'सामान्य डेवलपमेंटल डिसऑर्डर' है.
हालाँकि वो स्वीकार करते हैं कि ये महिलाओं के आत्मविश्वास पर असर डाल सकता है.
मारसेलो प्रैसेजेस कहते हैं, "लेकिन बड़ा क्लिटोरिस होना कोई बीमारी नहीं है."
क्लिटोरोप्लास्टी क्या है?
क्लिटोरिस के आकार को छोटा करने से महिलाओं की कामुकता पर कोई असर नहीं पड़ता है.
इस अंग में 8000 से अधिक नसों का आख़िरी सिरा होता है. एक छोटे बटन की तरह क्लिटोरिस का आकार हर महिला में अलग-अलग होता है.
डॉ. प्रैसेजेस क्लिटोरिस बड़े होने (क्लिटोरोमेगैली) के पीछे कुछ कारण गिनाते हैं.
वे कहते हैं कि इसकी वजह आनुवांशिक या हार्मोनल डिसऑर्डर या स्टेरॉयड का इस्तेमाल आदि में से कुछ भी हो सकता है.
स्टेरॉयड अक्सर तेज़ी से मांसपेशियाँ बढ़ाने के लिए लिए जाते हैं.
इसके अनियमित विकास के पीछे प्रेग्नेंसी के दौरान लिए जाने वाले हार्मोंस भी कारण हो सकते हैं. कुछ ट्यूमर भी मेल हार्मोन को बढ़ाने का कारण होते हैं.
लेकिन अगर बहुत ज़्यादा अनियमित वृद्धि होती है, तो इसके पीछे पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) भी एक बड़ा कारण हो सकता है.
डॉ. प्रैसेजेस कहते हैं, "पीसीओएस प्रजनन की उम्र वाली महिलाओं में एक कॉमन एंडोक्राइन बीमारी है और इस उम्र में इसके होने की आंशका 5% से 7% होती है."
क्या क्लिटोरिस का कोई निश्चित आकार होता है?
डॉ. प्रैसेजेस के मुताबिक़, "इसकी वजह से मासिक धर्म अनियमित हो सकता है, मुँहासे हो सकते हैं, शरीर पर अधिक बाल उग सकते हैं और अधिक गंभीर मामले में क्लिटोरिस में अनियमित वृद्धि हो सकती है."
इसकी वजह से सेक्स के दौरान असहजता पैदा हो जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि क्लिटोरोमेगैली के कारण कई महिलाएँ बिकनी या टाइट फिटिंग के कपड़े नहीं पहन पातीं.
डॉ. प्रैसेजेस कहते हैं, "सर्जरी के दौरान हम बहुत बारीक तरीक़े से बड़े आकार वाले ऊतकों को हटाते हैं. लेकिन हम संवेदनशील हिस्से और नसों को नहीं छेड़ते, जो सबसे अहम हिस्सा हैं."
डॉक्टरों का मानना है कि इसका कोई मानक आकार नहीं होता है. इसलिए जब इससे असहज होने की स्थिति पैदा हो, तो विशेषज्ञ से सुझाव लेना चाहिए.
डॉ. प्रैसेजेस की सलाह है, "ये मरीज़ को तय नहीं करना चाहिए कि वो कैसा महसूस करता है. अगर आकार में थोड़ा परिवर्तन होता है और इससे व्यक्ति संतुष्ट है तो कोई समस्या नहीं है."
हालाँकि चिकित्सा विज्ञान में इसका आंकलन करने के लिए एक पैमाना है जिसे प्राडेर कहते हैं. इसमें एक से चार तक नंबर होते हैं, जिससे जननांगों की अनियमित वृद्धि को मापा जाता है लेकिन ये काम विशेषज्ञ ही कर सकते हैं.
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