शरीर को लेकर शर्मिंदा होने की बजाय तारीफ़ करना सीख रहे लोग

टिकटॉक पर @summerkmorgan, @danieledriusso और ईरीन चेम्बर्स शरीर को लेकर शर्मिंदा होने की बात करती हैं

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ईमानदारी से बात की जाए, तो सोशल मीडिया पर स्क्रौल करते हुए, जिसमें आपको एक से एक ख़ूबसूरत चेहरे आपके मोबाइल फ़ोन पर बार-बार सामने आते रहते हैं ये आसान नहीं कि आप ख़ुद की तुलना दूसरों से करें.

लेकिन टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे साइट्स पर एक मूवमेंट तेज़ी से जारी है जिसमें इस बात पर फ़ोकस किया जाता है कि आपका शरीर आपके क्या काम आता है न कि इस बात पर वो दिखता कैसा है.

'ये थुलथुल, बदसूरत बांह है' कहने की बजाए, आप ये कह सकते हैं कि 'ये इंसान के हाथ हैं. ये सामान को उठाते हैं और नीचे डालते हैं', ईरीन चैंबर्स समझाते हुए कहती हैं.

वो शरीर को लेकर शर्मिंदा न होने के मूवमेंट का सालों से हिस्सा रही हैं.

आपने शायद शरीर को लेकर सकारात्मक सोच बनाने के बारे में सुना होगा, जिसमें प्लस-साइज़ महिलाओं और पुरुषों को बेहतर होने का अहसास कराया जाता है. साथ ही हर प्रकार, साइज़, लिंग, जाति, शारीरिक क्षमता या वो जैसा दिखता है उसको लेकर उनमें बेहतर सोच तैयार की जाती है.

लेकिन ईरीन का कहना है कि शरीर को लेकर निष्पक्ष रहने की मुहिम में आपको ये कहने की ज़रूरत नहीं होती कि 'मैंने इस तरह की मॉडल्स जैसी बांहे आज तक नहीं देखी.

ईरीन चेम्बर्स

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शरीर को लेकर शर्मिंदा होना क्या है?

ईरीन समझाती हैं कि शरीर को लेकर निष्पक्ष रहने की मुहिम शरीर को लेकर सकारात्मक और नकारात्मक सोच के बीच की स्थिति है.

वो कहती हैं, "कभी कभी हमारे ऊपर ये दबाव होता है कि हम अपने शरीर से हर समय प्यार करें... ताकि हममें वो भरोसा पैदा हो सके... अगर ऐसा है तो ठीक है लेकिन अगर नहीं है तो भी कोई बात नहीं."

"आप अपने शरीर पर मुग्ध नहीं हैं तो आपको इस बात का एहसास नहीं होना चाहिए कि आप जीवन में नाकाम हो रहे हैं."

ईरीन कहती हैं कि वो इन मामलों में सख़्त रवैये ही देखती रही हैं.

'या तो मैं सुनती थी कि मुझे अपने जिस्म से नफ़रत है... मैं शरीर के अपने इस हिस्से को बदल देना चाहती हूं' या 'मुझे अपने शरीर से प्यार है, मैं ख़ूबसूरत हूं, मैं देवी समान दिखती हूं' और कभी-कभी ये होता था कि 'मुझे अपने शरीर से घृणा नहीं है लेकिन मैं ख़ुद को देवी भी नहीं महसूस करती हूं.'

शरीर को लेकर तटस्थ रहने के मूवमेंट ने उसके ज़हन पर जो एक बोझ था उसे हटा दिया.

उसे इसके बारे में सबसे पहले टंब्लर पर पता चला और फिर उसे अहसास हुआ कि उसे हमेशा इस अंदाज़ में नहीं सोचना है.

वो अकेली नहीं है. इस मामले पर ईरीन के टिकटॉक को लोग पसंद कर रहे हैं और उसके वीडियो को 52,000 लाइक्स मिल चुके हैं.

ये मूवमेंट बहुत शोहरत हासिल कर रहा है. #BodyNeutrality को टिकटॉक पर 60 लाख लोग देख चुके हैं और इंस्टाग्राम पर इसका रिज़ल्ट 63 हज़ार है.

साथ-साथ ये मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों में भी प्रचलित हो रहा है जो इसका इस्तेमाल उन मरीज़ों पर कर रहे हैं जो अपने शरीर को लेकर शर्मिंदा रहते हैं.

वीडियो कैप्शन, 'बाइक को जेंडर पता नहीं होता'
डॉक्टर मोर्गन फ्रांसिस, मेन्टल हेल्थ थेरपिस्ट

मैं इसकी प्रैक्टिस कैसे कर सकता हूं और विशेषज्ञ इसे लेकर क्या सोचते हैं?

ईरीन कहती हैं आप ख़ुद से इसे शुरू करें और इसका सबसे बहेतर तरीक़ा है ख़ुद से बात करें.

अगर आप ख़ुद को आइने में देख रही हैं तो हो सकता है कि आप ये न कह पाएं कि आप ख़ूबसूरत हैं क्योंकि उस पर शायद आपको यक़ीन न आए लेकिन आप ये ज़रूर कह सकती हैं कि आप एक इंसान हैं क्योंकि उसके सच होने में किसी तरह का शुबहा नहीं है. अगर आप ये कहना चाहती हैं कि आप एक क्यूट लड़की हैं तो आप ऐसा कह सकती हैं. लेकिन अगर इतना भी कह सकती हैं कि आप एक मनुष्य हैं तो वही कहें.

जो मानसिक स्वास्थ्य की थैरेपिस्ट डॉक्टर मॉर्गेन फ्रांसिस अपने मरीज़ों को शरीर को सराहने की भावना सिखाती है, जो उनके हिसाब से शरीर को लेकर निष्पक्षता की एक सब-कैटेगरी है.

ये इस बारे में है कि हमारा शरीर हमें क्या करने में मदद करता है... उसके लिए शरीर का आदर करने की भावना. ये काम-काज को लेकर है, कि कैसे आपका पैर आपको मज़बूती देता है, किस तरह से आप अपने बाज़ुओं की मदद से अपने बच्चे को गोद में लेते हैं या उसे गले लगाते हैं.

डॉक्टर फ्रांसिस का कहना है कि शरीर को लेकर निष्पक्ष रहने का ये मतलब नहीं है कि आप अपने जिस्म की परवाह नहीं करते.

आप मज़बूत और शक्तिशाली होना पसंद है लेकिन आप सिर्फ़ इसी एक बात के बारे में नहीं सोच रहे.

डॉक्टर फ्रांसिस के मुताबिक़ मूवमेंट की प्रसिद्धि की वजह क्या है?

वो कहती हैं साधारण शब्दों में शरीर को लेकर निष्पक्षता सुरक्षित है और ये बहुत सारे लोगों के लिए बहुत यथार्तवादी है.

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